प्रशासन बैकफुट पर, मांगे गए निर्देश

kabir Sharma
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अल्पसंख्यक अधिकारी का कार्यपाल को पत्र, पूछा किस प्रकार की कार्रवाई की जाए, मुख्य कार्यपालक पत्र तय करेगा यथास्थिति की स्थिति

मेरठ। शहर की वक्फ मनसबिया का ‘सरताज’ बनने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बाद डीएमओ (डिस्ट्रिक्ट माइनॉरिटी ऑफिसर) बैकफुट पर आ गए हैं।

मांगे निर्देश

उन्होंने उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी से इस पूरे मामले में दिशा निर्देश मांगे हैं। बता दें कि पूर्व में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रूहेल आजम ने पूर्व मुतवल्ली दानिश जाफरी को पत्र भेज कर कहा था कि वक्फ अधिनियम की धारा 65 (5) के अंतर्गत वक्फ मनसबिया का नियंत्रण शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अपने अंडर में ले लिया है और यहां प्रशासक के रूप में जफर सज्जाद की तैनाती कर दी गई है। इसके अलावा प्रशासक जफर सज्जाद ने भी वक्फ के प्रबंधन की जिम्मेदारी बाकर ज़ैदी को सौंप दी है।

बाकर जैदी छह माह के लिए

बाकर ज़ैदी की नियुक्ति 6 माह के लिए की गई। इस पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रूहेल आजम ने पूर्व मुतवल्ली दानिश जाफरी को बोर्ड के आदेश का अनुपालन करते हुए अपने समस्त कार्य प्रभार संबंधित को तत्काल हस्तांतरित करने के आदेश दिए।

दानिश जाफरी को चेतावनी

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने दानिश जाफरी को यहां तक चेतावनी दे दी कि यदि संबंधित आदेश का पालन नहीं हुआ तो उस स्थिति में उनके खिलाफ विधिक कार्यवाही की जाएगी। यहां से मामले ने और तूल पकड़ लिया। दानिश जाफरी पक्ष ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के इस पत्र से असहमति जताते हुए उन्हें स्पष्ट कर दिया कि जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है तब ऐसे में प्रशासक और फिर कंट्रोलर की नियुक्ति औचित्यहीन है।

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बैकफुट की मजबूरी

मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन होने और उसमें अभी तक कोई फैसला न होने के चलते जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय बैकफुट पर आ गया और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रूहेल आजम ने फौरन शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र लिखकर उनसे पूछा है कि उक्त प्रकरण हाई कोर्ट में विचाराधीन होने की स्थिति में वक्फ मनसबिया के प्रबंधन को लेकर यथास्थिति बनाए रखने अथवा नहीं रखने के संबंध में आदेश दें और भ्रम की स्थिति दूर करें। बता दें कि इस मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए 10 फरवरी की तारीख लगी हुई है।

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