दशकों से रिक्त पदों पर कर रहे हैं काम, तो क्या की गई शासनादेशों की गलत व्याख्या, आउटसोर्स में शुमार किए जाने के बाद शासन के हित लाभ से वंचित
मेरठ। जो सफाई कर्मचारी रिक्त होने वाले पदों पर दशकों से काम कर रहे हैं, नगर निगम अफसरों ने खेल करते हुए ऐसे सभी कर्मचारियों को आउटसोर्स में शुमार कर दिया। अफसरों की इस कारगुजारी का नुकसान यह हुआ कि ऐसे कर्मचारियों को शासन से जो लाभ मिल सकता था उससे वो हमेशा के लिए वंचित कर दिए गए है। अफसरों की इस कारगुजारी की जानकारी जब हिन्द मजदूर सभा को किसी तरह से मिली तो मामले की शिकायत मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से की गयी। नौबत यहीं तक नहीं रही, निगम में ठेकेदारी प्रथा खत्म करने का जो प्रस्ताव बोर्ड बैठक में तत्कालीन सांसद, राज्यमंत्री व विधायक की मौजूदगी में सर्वसम्मति से पास किया गया था उस पर पहले शासन से गाइड लाइन मांगने वाला निगम प्रशासन ने बाद में यूटर्न ले डाला, जिसके बाद सफाई कर्मचारियों की रही सही उम्मीद भी टूट गयी।
निगम में होनी है भर्ती
नगर निगम में मानक के अनुसार सफाई कर्मियों की भर्ती किए जाने के लिए वर्ष 2017 में, शासनादेश जारी हुआ था। हिन्दू मजदूर सभा के जिला मंत्री विनेश विद्यार्थी का आरोप है कि बीते पांच साल तक नगर निगम शासनादेश का अनुपालन नहीं किया गया, परिणामस्वरूप नगर निगम मेरठ द्वारा पांच वर्षों से शासनादेश के उल्लंघन किए जाने के सम्बन्ध में, कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, कुछ माह पहले भर्ती प्रक्रिया क प्रारम्भ की जानकारी मिली है लेकिन भर्ती के लिए क्या मापदंड अपनाया जा रहा है, उस सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है, जिससे स्पष्ट है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को दरकिनार किया जायेगा।
एसडीएम ने दिए हैं जांच के आदेश
शनिवार 7 फरवरी को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/ उप जिलाधिकारी ने विनेश विधार्थी की शिकायत पर, अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी पी सी एस को कार्यवाही के आदेश दिए हैं। आरोप है कि प्रतिवेदन में शासनादेशो की नगर निगम मेरठ पटल पर ग़लत व्याख्या कर, दशकों से सफाई कर्मियों के स्वीकृत रिक्त पदों पर कार्य कर रहे सफाई कर्मियों को, आउटसोर्स दर्शाया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप सफाई कर्मियों के भविष्य के सभी हित लाभ खत्म कर दिए गए हैं। विनेश विद्यार्थी की माने तो उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भारत सरकार को प्रतिवेदन लिखा गया था, प्रतिवेदन का संज्ञान लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा जिला मजिस्ट्रेट को प्रकरण की जांच कर, कार्यवाही की रिपोर्ट तलब की थी किन्तु नगर आयुक्त नगर निगम द्वारा जिला मजिस्ट्रेट के द्वारा मा आयोग के पत्र के अनुसार, जांच कर, जांच रिपोर्ट प्रेषित करने के लिए निर्दिष्ट किया गया था। उस मामले में अभी तक निगम ने कोई कार्यवाही नहीं की है। 7 फरवरी में सम्पूर्ण समाधान दिवस अधिकारी/ ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, उप जिलाधिकारी के पटल पर कार्यवाही की मांग की गई है।
पारदर्शिता ना होने के आरोप
मानक के अनुसार सफाई कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी नजर आ रही है, वर्ष 2017 में मानक के अनुसार सफाई कर्मियों की भर्ती करने के लिए, निदेशक स्थानीय निकाय, उ प्र शासन लखनऊ द्वारा नगर आयुक्त नगर निगम को निर्देश दिए गए थे, वर्ष 2017 से 2025 तक नगर आयुक्त नगर निगम द्वारा अनुपालन नहीं किया गया था, अब अनुपालन प्रकिया प्रारम्भ की जा रही है किंतु भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता से परहेज़ किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप रसूखदारो की सूची ही मान्य होगी, जबकि 4 जुलाई 2016 के शासनादेश के अनुसार, विगत में काम कर चुके सफाई कर्मियों को ही वरियता दिए जाने हेतु निर्देशित किया गया है किंतु शासनादेश की पुनः अवज्ञा की संभावना है। विनेश का कहना है कि यदि घालमेल किया गया तो फिर निगम के अफसरो को आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
क्या हुआ निगम बोर्ड के प्रस्ताव का
हिन्द मजदूर सभा के मंत्री का सवाल है कि सांसद, राज्यमंत्री और विधायक सरीखे माननीयों की मौजूदगी में जो प्रस्ताव ठेकेदारी प्रथा को समाप्त किए जाने का पारित किया गया था।उसका क्या हश्र किया गया, यह तो निगम अफसर ही बता सकते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि 20 जून साल 2023 को भाजपा के तत्कालीन सांसद राजेंद्र अग्रवाल, कैंट विधायक अमित अग्रवाल व एमसएलसी डा. धर्मेन्द्र भारद्वाज अरैर महापौर हरिकांत अहलूवालिया की मौजूदगी में नगर निगम बोर्ड द्वारा सफाई कर्मियों की ठेकेदारी खत्म करने का बोर्ड प्रस्ताव पारित किया गया था, वह प्रस्ताव नगर आयुक्त नगर निगम द्वारा निष्प्रयोज्य दर्शा दिया गया है, विचित्र बात यह है कि देश की और उ प्र की सरकार तथा नगर निगम मेरठ जिसे भाजपा की ट्रपल इंजन सरकार कहा जाता है, द्वारा लिए गए संयुक्त फैसले पर, विराम लगा दिया गया है। क्या निगम का कोई भी अफसर बोर्ड से ऊपर हो सकता है। इसके पीछे जो भी मंतव्य है उसकी जांच की जानी चाहिए।
यह कहना है महापौर का
महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने बताया कि नगर निगम ने जो प्रस्ताव पारित किया था, उसके बाद वह स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले थे। पूरे प्रकरण की जानकारी दी थी, जिसके बाद सीएम योगी के निर्देश पर शासन ने मेरठ नगर निगम से उक्त प्रस्ताव भेजे जाने का आग्रह किया था।