कीमत जिंदगी की सामान मौत का

कीमत जिंदगी की सामान मौत का
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कीमत जिंदगी की सामान मौत का,

-एफ्रेसिस मशीन ही नहीं थी तो फिर कैसे तैयार हो रही थी प्लेटलेटस

-शहर के ब्लैड बैंकों को लेकर उठ रह हैं गंभीर सवाल, नियमित जांच की जरूरत

-कहने को ब्लड बैंक मगर मौके पर नहीं मिला डाक्टर, स्टाफ की काबलियत भी संदेहास्पद

-खामियों का मिला था अंबार, ड्रग अफसरों ने लखनऊ भेजी रिपोर्ट, निरस्त हो सकता है लाइसेंस

शेखर शर्मा

चंद सिक्कों के लिए जिंदगी की कीमत पर इंसानियत के दुश्मन मौत का सामान बेच रहे हैं। यह पूरा मामला हापुड़ रोड क्षेत्र में संचालित एक बल्ड बैंक शाइन चैरिटेबल ब्लड बैंक सेंटर से जुड़ा है। जिसको लेकर हैरान करने वाली बातें सामने आयी हैं। ब्लैड बैंक वो जगह होती है जहां से मौत से जिंदगी की जंग लड़ने वालों के लिए रक्त की जरूरत पूरी की जाती है। इसके अलावा तमाम गंभीर रोगियों को जब रक्त की जरूरत होती है खासकर उन रोगियों जो मौत के मुहाने पर खड़े होते हैं, जिनके जिस्म में किसी बीमारी के चलते प्लेट लेटस कम हो जाते हैं, उनके लिए प्लेट लेटस का इंतजाम शहर के कुछ ब्लड बैंकों से किया जाता है। जिस शाइन चैरिटेबल ब्लड बैंक जहां ड्रक विभाग की टीम ने विगत दिनों छापा मारा था, वहां भी प्लेट लेटस उपलब्ध करायी जाने का दावा किया जाता था, प्लेट लेटस जिस्म के लिए कितनी जरूरी हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि प्लेट लेटस कम हो जाए या प्लेट लेटस का इंतजाम होने में तनिक भी देरी हो जाए तो मौत झपटा माकर जिंदगी को छीन लेती है। सवाल उठता है कि जब एफ्रेसिस मशीन ही नहीं है तो फिर प्लेट लेटस के नाम पर जरूरतमंदों को क्या दिया जा रहा है।

प्लेट लेटस का दावा लेकिन एफ्रेसिस मशीन ही नहीं

शाइन ब्लड बैंक जहां ड्रग की टीम पहुंची थी  वहां प्लेट लेटस की उपलब्धता का भी दावा किया जाता था, लेकिन ड्रग की टीम की कार्रवाई के दौरान वहां प्लेट लेटस बनाने वाली मशीन एफ्रेसिस ही नहीं थी। जब एफ्रेसिस मशीन ही नहीं थी तो फिर प्लेट लेटस कैसे और कहां से तैयार की जा रही थीं। या फिर यह मान लिया जाए कि प्लेट लेटस के नाम पर खालिस रक्त की थैलियां थमायी जा रही थीं। हालांकि यह जांच तकनीकि जांच का भी विषय है। लेकिन बकौल ड्रग एडीसी अरविंद कुमार के जब छापा मार गाया तो शाइन चैरिटेबल ब्लड बैंक में एफ्रेसिस मशीन ही नहीं थी।

ऐसे प्लेट लेटस तैयार करती है एफ्रेसिस मशीन ही नहीं थी

ड्रक विभाग के एडीसी अरविंद कुमार ने इस संवाददाता से जिस एफ्रेसिस मशीन के न मिलने का जिक्र किया है, उसकी अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आमतौर पर जीवन रक्षक प्लेट लेटस का इंतजाम इस मशीन के बगैर संभव ही नहीं है। अब यह समझ लीजिए कि यह मशीन कैसे काम करती है। जब किसी मरीज को प्लेट लेटस की जरूरत होती है तो उसके लिए एक डोनर तलाश जाता है। जो काम आसान नहीं है। यदि डोनर मिल जाता है तो इस एफ्रेसिस मशीन की मदद से प्लेट लेटस तैयार की जाती हैं। इसकी भी एक प्रक्रिया है। जो भी ब्लड डोनर होता है, उससे एफ्रेसिस मशीन रक्त लेती रहती है। उसको एक अलग थैली में जमा करती है। उस रक्त से प्लेट लेटस निकाली जाती हैं। प्लेट लेटस निकालने के बाद जो रक्त होता है उसको एफ्रेसिस मशीन की मदद से डोनर के जिस्म में वापस भेजा जाता है। यह एक जटिल चिकित्सकीय प्रक्रिया है जो बगैर एफ्रेसिस मशीन के संभव नहीं है। इसलिए ड्रग एडीसी ने इसको लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

एफ्रेसिस मशीन ही नहीं कई अन्य खामियां भी

अरविंद गुप्ता, सहायक आयुक्त (औषधि) मेरठ मंडल, मेरठ के निर्देशानुसार  पियूष कुमार औषधि निरीक्षक , श्रीमती प्रियंका चौधरी औषधि निरीक्षक, मेरठ एवं श्री गौरव लोधी औषधि निरीक्षक मेरठ मंडल द्वारा कतिपय वैध् लाइसेंस ब्लड सेन्टर, शाइन चैरिटेबल ब्लड सेन्टर पर विगत 29 सितंबर को जब  कार्रवाई की गई। जांच के दौरान ब्लड सेन्टर में अनेकों अनियमितताएं पाई गई जिनमें मुख्यतः 1. ब्लड सेन्टर में Apheresis मशीन के ना होते हुए भी SDP इश्यू किये जाना जिनका मास्टर रजिस्टर एवं इश्यू रजिस्टर में कहीं कोई रिकॉर्ड नहीं पाया गया। 2. बिना MOIC के ब्लड सेन्टर का संचालन किया जा रहा था। 3. कार्यरत स्टाफ द्वारा बताए गए कलेक्शन से फिजिकल स्टाक का मिलान ना हो पाना। ब्लड सेन्टर में पाईं गईं अन्य सभी कमियो का उल्लेख जांच आख्या में करते हुए आख्या सहायक आयुक्त (औषधि) मेरठ मंडल एवं HQ, लखनऊ को प्रेषित की जा रही है। जनहित को ध्यान में रखते हुए ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 की धारा 22(1)(d) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए शाइन चैरिटेबल ब्लड सेन्टर, हापुड़ अड्डा मेरठ को अग्रिम आदेशों तक तत्काल प्रभाव से बन्द करा दिया गया है।

लखनऊ भेज दी गयी रिपोर्ट

एडीसी ड्रग अरिवंद गुप्ता ने बताया कि एक सूचना के आधार पर शाइन ब्लड बैंक में कार्रवाई की थी। पियूष कुमार औषधि निरीक्षक , श्रीमती प्रियंका चौधरी औषधि निरीक्षक, मेरठ एवं श्री गौरव लोधी औषधि निरीक्षक मेरठ मंडल इस कार्रवाई में शामिल रहे। मौके पर प्लेट लेटस बनाने वाली मशीन एफ्रेसिस नहीं पायी गयी। कई अन्य खामियां भी मिलीं। इसको लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट लखनऊ भेज दी गयी है।

ब्लड बैंक संचालक से नहीं हो सका संपक

शाइन चैरिटेबल ब्लड बैंक पर तमाम खामियां गिनाते हुए जो कार्रवाई ड्रक अफसरों की है उसको लेकर संचालक का पक्ष तमाम प्रयासों के बाद भी नहीं लिया जा सका। जिसकी वजह से उनका पक्ष यहां उल्लेख नहीं किया जा सका है। यदि वह पक्ष देंगे तो उसको भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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