हाईकोर्ट बैंच के लिए पूर्ण बंद रहेगा मेरठ

kabir Sharma
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राज्यसभा में सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी उठाया मामला, पचास साल पुरानी मांग, कई बार पास हो चुका है विस से प्रस्ताव

मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच स्थापना की पांच दशक से ज्यादा पुरानी मांग को लेकर 17 दिसंबर बुधवर को मेरठ पूर्ण बंद रहेगा। इसलिए यदि कहीं जाने का इरादा है तो साेच समझ कर निकले। इस दौरान धरने प्रदर्शकों का भी एलान किया गया है। बंद को डाक्टरों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, होटल संचालकों और विभिन्न संगठनों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। शहर की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण संस्था अलेग्जेंडर क्लब ने भी बंद का समर्थन किया है। अलेग्जेंडर क्लब के उपाध्यक्ष जेपी अग्रवाल ने बताया वो भी चाहते हैं कि हाईकोर्ट की बैंच मेरठ को मिले। उन्होंने कहा कि पचास साल पुरानी इस मांग को केंद्र सरकार को पूरा करना चाहिए।

सभी कुछ रहेगा बंद

संयुक्त व्यापार संघ की दोनों इकाइयों ने बंद का समर्थन किया है। मंगलवार को संयुक्त व्यापार संघ निर्वाचित के अध्यक्ष नवीन गुप्ता, अमित बंसल, नीरज मित्तल आदि बंद के लिए गाड़ियों से प्रचार करते देखे गए। संयुक्त व्यापार संघ अजय गुप्ता नटराज के पदाधिकारियों ने भी बंद का समर्थन किया है। शहर में अंकुर गोयल खंदक और कैंट सदर में अंकित गुप्ता मनु आदि ने बंद के समर्थन में प्रचार किया।महानगर के सभी बाजार, प्रतिष्ठान और पेट्रोल पंप बंद रहेंगे। शारदा रोड, गढ़ रोड, नवीन मंडी, सब्जी-अनाज मंडी समेत कई व्यापार मंडलों ने बंद का समर्थन किया है। गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, होटल-रेस्टोरेंट संचालक और टेंट व्यावसायी भी बंद में शामिल होंगे। स्कूल-कॉलेजों पर भी असर पड़ सकता है।

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राज्यसभा में सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी उठाया मामला, पचास साल पुरानी मांग, कई बार पास हो चुका है विस से प्रस्तावमेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच स्थापना की पांच दशक से ज्यादा पुरानी मांग को लेकर 17 दिसंबर बुधवर को मेरठ पूर्ण बंद रहेगा। इसलिए यदि कहीं जाने का इरादा है तो साेच समझ कर निकले। इस दौरान धरने प्रदर्शकों का भी एलान किया गया है। बंद को डाक्टरों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, होटल संचालकों और विभिन्न संगठनों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। शहर की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण संस्था अलेग्जेंडर क्लब ने भी बंद का समर्थन किया है। अलेग्जेंडर क्लब के उपाध्यक्ष जेपी अग्रवाल ने बताया वो भी चाहते हैं कि हाईकोर्ट की बैंच मेरठ को मिले। उन्होंने कहा कि पचास साल पुरानी इस मांग को केंद्र सरकार को पूरा करना चाहिए।सभी कुछ रहेगा बंदराजनीतिक दलों का समर्थनइसलिए जरूरी हैं बैंचबैंच की मांग को लेकर टाइल लाइन

राजनीतिक दलों का समर्थन

बंद के समर्थन देने वाले तमाम संगठनों पर भाजपा का कब्जा है, इसलिए भाजपा का समर्थन स्वत ही है। इनके अलावा महानगर कांग्रेस के रंजन शर्मा, रालोद व सपा नेताओं ने भी बंद का समर्थन किया है। सरधना में विभिन्न राजनीतिक दलों और व्यापारिक संगठनों ने समर्थन दिया। सोशल मीडिया एसोसिएशन ने भी जोरदार समर्थन का ऐलान किया। संयुक्त प्रेस क्लब के अतुल माहेश्वरी ने समर्थन पत्र सौंपा उनके अलावा दूसरे मीडिया संगठन भी चाहते हैं कि प्रेस क्लब बनें। सदर व आबूलेन व्यापार संघ समेत तमाम व्यापारी संगठनों ने बंद को समर्थन दिया है।

इसलिए जरूरी हैं बैंच

युवा एडवोकेट गौरव गोयल सदर, सीनियर एडवोकेट चौधरी यशपाल सिंह, यूपी के वरिष्ठ पत्रकार रवि विश्नाई, युवा पत्रकार अंकित विश्नाई, सुरेन्द्र शर्मा, डा. एमके बंसल, संदीप अल्फा, गुड्डू अल्फा, भाजपा के युवा जाट नेता अंकित चौधरी, शक्ति सिंह, वीरेन्द्र वर्मा एडवोकेट व मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा आदि का कहना पाकिस्तान स्थित लाहौर पास है और मेरठ से हाईकोर्ट इलाहाबाद दूर है। पश्चिमी यूपी के 22 जिलों की आबादी करीब 8-10 करोड़ है। प्रयागराज हाईकोर्ट 700-800 किमी दूर है, जिससे आम लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय मिलना मुश्किल हो जाता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि पश्चिमी यूपी 70-75% राजस्व देता है, फिर भी सौतेला व्यवहार हो रहा है। यहां तक कि लाहौर हाईकोर्ट भी मेरठ से करीब है। उन्होंने बताया कि हाल में महाराष्ट्र में कोल्हापुर बेंच जैसे फैसलों से यह मांग और तेज हुई है। अधिवक्ता गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की तैयारी कर रहे हैं। सांसद अरुण गोविल ने भी इस मुद्दे पर समय मांगा है। भाजपा के राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी अनेकों बार बैंच की मांग सदन में उठा चुके हैं। निर्णय सरकार को लेना है। यह बंद जनआंदोलन का रूप लेता दिख रहा है। यदि मांग पूरी नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज हो सकता है। प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए तैयारियां की हैं।

बैंच की मांग को लेकर टाइल लाइन

साल 1955 मांग की शुरुआत। तत्कालीन यूपी मुख्यमंत्री डॉ. संपूरणानंद ने केंद्र सरकार को पश्चिमी यूपी (मेरठ या आगरा) में बेंच स्थापना की सिफारिश की। 1981-1985: जस्टिस जसवंत सिंह कमीशन गठित। इसने अविभाजित यूपी के लिए तीन बेंचों की सिफारिश की – आगरा में एक स्थायी बेंच (पश्चिमी यूपी के लिए) और देहरादून-नैनीताल में सर्किट बेंच। उत्तराखंड अलग होने के बाद देहरादून वाली सिफारिश लागू हो गई, लेकिन आगरा/पश्चिमी यूपी वाली नहीं। आंदोलन तेज। साल 2000 से अधिवक्ताओं ने हर शनिवार न्यायिक कार्य से विरत रहना शुरू किया। कई बार हड़तालें, प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे गए। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने भी संसद में समर्थन किया। 2016 में मेरठ सांसद ने लोकसभा में बिल पेश किया। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की, कहा कि यह न्यायिक नहीं बल्कि नीतिगत मामला है। इस साल दोलन फिर चरम पर। महाराष्ट्र में कोल्हापुर बेंच बनने से तुलना कर अधिवक्ताओं ने अगस्त से हर शनिवार हड़ताल शुरू की। सितंबर में बड़े प्रदर्शन, ज्ञापन और मार्च। नवंबर में सांसदों का घेराव। दिसंबर में 17 दिसंबर को मेरठ बंद का आह्वान। केंद्रीय संघर्ष समिति के नेतृत्व में 22 जिलों के वकील, व्यापारी और राजनीतिक दल एकजुट। सांसदों और गृह मंत्री से मुलाकात की तैयारी।

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