LLRM मेडिकल में स्टाफ नहीं कैसे हो इलाज, स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ करने का आग्रह, मानक के अनुरूप हो स्टाफ
मेरठ। मरीजों की संख्या बेतहाश बढ़ती जा रही है। समाज के गरीब और मध्य वर्ग के लोगों के लिए महंगाई के इस दौर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का ही सहारा होता है। लेकिन एलएलआरएम मेडिकल में तो चिकित्सकीय स्टाफ ही नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएं कैसे मिल सकेंगी। सांसद अरुण गोविल ने अब इसके लिए प्रयास शुरू किए हैं। उन्होंने प्रदेश के सीएम योगी को पत्र लिखकर लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी, सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक की निष्क्रियता तथा स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है। सांसद अरुण गोविल ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए यह मेडिकल कॉलेज जीवन रेखा के समान है, जहां मेरठ सहित आसपास के जनपदों के लाखों मरीज उपचार हेतु पहुंचते हैं। ऐसे में यहाँ स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत एवं सक्षम होना अत्यंत आवश्यक है।
ये है मेडिकल की स्थिति
सांसद योगी ने अपने पत्र में सीएम योगी का अवगत कराया है कि एलएमआरएम मेडिकल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी – स्वीकृत 52 पदों के सापेक्ष मात्र 23 चिकित्सक ही कार्यरत हैं, जिससे गंभीर मरीजों को अन्य शहरों के बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है। १५० करोड़ की लागत से तैयार किया गया मेडिकल का सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक बंद है। यह ब्लॉक विशेषज्ञों के अभाव में संचालित नहीं हो पा रहा है, जिससे सरकारी निवेश भी निष्प्रभावी हो रहा है।
स्टाफ की भारी कमी
सांसद ने अपने पत्र में सबसे ज्यादा जोर मेडिकल में चिकित्सकीय स्टाफ की कमी पर दिया है। उन्होंने सीएम योगी को बताया है कि नर्सिंगग स्टाफ की भारी कमी है। मेडिकल में 881 स्वीकृत पदों के विरुद्ध केवल 327 नर्सें कार्यरत हैं, इससे मरीज देखभाल व्यवस्था को प्रभावित कर रही है। इसके अलावा उन्होंने अपने पत्र में मेडिकल में कार्यरत चिकित्सकों में संविदा कार्य एवं निजी प्रैक्टिस का मुद्दा समाधान मांगता है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार से वित्त एवं प्रशासनिक सहयोग मिले तो व्यवस्थाएं बेहतर हो सकती हैं। सांसद अरुण गोविल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं पैरामेडिकल कर्मियों की नियुक्ति कर मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था सुदृढ़ की जाए, ताकि प्रदेश विशेषकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हो सकें।