कुछ भी करने से गुरेज नहीं, मुतवल्ली पक्ष का दावा कि यह पद कोई ‘वेकेंसी’ नहीं, जो रिक्त माना जाए, मनसबिया प्रशासन कोर्ट जाने की तैयारी में
नई दिल्ली/मेरठ। लखनऊ के बाद प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी मेरठ की वक्फ मनसबिया का जिन्न फिर बोतल से बाहर निकलने को तैयार है। मनसबिया का ‘सरताज’ बनने के लिए हसरतें फिर पलने लगी हैं। हालांकि इन सबके बीच वर्तमान मनसबिया प्रशासन की दलील है कि यहां के मुतवल्ली का पद किसी ‘वैसेंसी’ की श्रेणी में नहीं आता, जिस पर कोई भी दावा ठोक दे।
मुतवल्ली पक्ष का दावा
मुतवल्ली पक्ष का दावा है कि उनके लिए मनसब अली खां का ‘वक्फनामा’ सबसे बड़ी ताकत है, जिसे कोर्ट भी मान चुका है। इस समय मनसब अली खां के खानदान के ही दानिश जाफरी यहां के मुतवल्ली हैं। उनकी नियुक्ति 23 फरवरी 2023 को हुई थी। अब यहां की मुतवल्लीशिप को लेकर सरगर्मियां एक बार फिर तेज़ हो गई हैं। शुक्रवार को मेरठ आए शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अली ज़ैदी के मुतवल्ली प्रकरण में स्थानीय प्रशासन से 22 फरवरी तक हस्तक्षेप करने संबंधी बयान के बाद मनसबिया की राजनीति एकाएक गरमा गई है।
बाकर जैदी का दावा
शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा यहां कंट्रोलर नियुक्त किए गए बाक़र ज़ैदी का विरोध शुरू हो गया है। मुतवल्ली पक्ष का मानना है कि जब यहां मुतवल्ली मौजूद है तो फिर कंट्रोलर नियुक्त करने का कोई औचित्य ही नहीं है। उधर दूसरी ओर वर्तमान मुतवल्ली दानिश जाफरी अपने पद पर बने रहने के लिए ‘रिन्यूवल एप्लीकेशन’ लगा चुके हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार यदि मनसब अली खां के वक्फनामे का आंकलन करें तो उसमें साफ लिखा है कि यह पद ‘वारिसान’ के लिए ही आरक्षित रहेगा। इसके चलते कोई बाहरी व्यक्ति मुतवल्ली पद के लिए क्लेम कर ही नहीं सकता। भले ही शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड अपने कानून की धारा 65 के तहत मेरठ की वक्फ मनसबिया पर बोर्ड के कंट्रोल का दावा कर रहा हो लेकिन मुतवल्ली पक्ष का मानना है कि बोर्ड भी नियमों के आधार पर कोई कार्रवाई कर सकता है।
कोर्ट में जाने को तैयार
इन सबके बीच मुतवल्ली पक्ष कोर्ट जाने की तैयारी में भी है। कुल मिलाकर मनसबिया की राजनीति किस करवट बैठती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन जिस ‘बैकडोर’ से मनसब अली खां के खानदान के बाहर का कोई भी व्यक्ति मुतवल्ली पद पर काबिज़ होना चाहेगा तो उसे शायद कोर्ट से क्लियरीफिकेशन लेना ही होगा। इस संवेदनशील मामले में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड को भी पारदर्शिता आधारित फैसला लेना होगा।