भारत पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया में शब ए बरात, अरब मुल्कों के साथ ही यूरोप व अमेरिका में भी, गुनाहों से तौबा की है रात शब ए बरात
नई दिल्ली/इस्लामाबाद, तेहरान/बगदाद। शब ए बरात पूरी दुनिया के मुसलमानों के बीच मनायी जा रही है। यह रात गुनाहों से तौबा की रात है। इस्लामी कैलेंडर के शाबान महीने की 15वीं रात को मनाई जाने वाली यह रात ‘क्षमा की रात’ या ‘मुक्ति की रात’ के रूप में जानी जाती है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, मध्य पूर्व के देशों से लेकर ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका तक लाखों मुसलमान इस मौके पर इबादत, दुआ और दान-पुण्य में लगे हुए हैं। इस साल शब-ए-बरात 3 फरवरी की शाम से शुरू होकर 4 फरवरी की सुबह तक मनाई जा रही है, हालांकि तारीख चंद्रमा की रौशनी पर निर्भर करती है।
अल्लाह बंदों के गुनाह है करते माफ
शब-ए-बरात या मिड-शाबान भी कहा जाता है, इस्लामी परंपरा में एक महत्वपूर्ण रात है। ‘शब’ का मतलब रात और ‘बरात’ का मतलब मुक्ति या क्षमा होता है। मुसलमानों का मानना है कि इस रात अल्लाह ताला अपने बंदों के गुनाहों को माफ करते हैं और उनकी दुआएं कबूल करते हैं। हदीसों के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) ने इस रात की अहमियत बताई है। एक हदीस में कहा गया है कि अल्लाह इस रात धरती पर अपनी रहमत नाजिल करते हैं और बंदों के पापों को माफ करते हैं, सिवाय उन लोगों के जो शिर्क (बहुदेववाद) करते हैं या दूसरों से दुश्मनी रखते हैं।
कुरान की तिलावत, दुआ और कब्रिस्तान में मगफिरत
इस रात का इतिहास इस्लामी कैलेंडर के आठवें महीने शाबान से जुड़ा है। यह रमजान से ठीक पहले आती है, इसलिए इसे रमजान की तैयारी के रूप में भी देखा जाता है। मुसलमान इस रात नमाज (नफ्ल), कुरान की तिलावत, दुआ और कब्रिस्तान जाकर अपनों के लिए मगफिरत की दुआ करते हैं। कुछ जगहों पर उपवास भी रखा जाता है। यह रात बंदों के भाग्य निर्धारण की रात मानी जाती है, जहां अल्लाह अगले साल के लिए हर जीव की तकदीर लिखते हैं।
इन मुल्कों में शब ए बारात
भारत दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और हैदराबाद जैसी जगहों पर मस्जिदें रोशनी से सजी हुई हैं। लोग रात भर इबादत करते हैं और सुबह कब्रिस्तान जाते हैं। कुछ राज्यों में यह छुट्टी का दिन है। वेबदुनिया हिंदी के अनुसार, भारत में यह 2 फरवरी शाम से 3 फरवरी सुबह तक मनाई जा रही है। पाकिस्तान के पंजाब में पंजाब सरकार ने 4 फरवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। लोग मिठाइयां बांटते हैं और आतिशबाजी करते हैं। कश्मीर में भी छुट्टी है। बंगलादेश व इंडोनेशिया मं इसे ‘निष्फ शाबान’ कहा जाता है। लोग घरों में विशेष भोजन बनाते हैं और दान देते हैं। इंडोनेशिया में मस्जिदों में सामूहिक दुआ होती है। मघ्य पूर्व एशिया के सऊदी अरब और यूएई में इसे कम धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन दुआ और नमाज पर जोर होता है। पश्चिम मुल्कों जिन्में ब्रिटेन में अल मुस्तफा वेलफेयर ट्रस्ट जैसी संस्थाएं इस रात दान अभियान चलाती हैं। कनाडा और अमेरिका में मुस्लिम समुदाय इसे निजी रूप से मनाते हैं, जहां रिफ्लेक्शन और चैरिटी पर फोकस होता है। मुस्लिम हैंड्स कनाडा के अनुसार, यह रात अल्लाह की रहमत की बरसात वाली रात है। इस पाक रात को जो कोई भी सच्चे दिन से अपनी भूल के लिए माफी मांगता है, अल्लाह उसके गुनाहों को माफ करके उस अपनी रहमतें बरसाता है. शब-ए-बारात के दिन दुआओं और जरूरतमंदों को दान करने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। इस पाक रात को जो कोई भी सच्चे दिन से अपनी भूल के लिए माफी मांगता है, अल्लाह उसके गुनाहों को माफ करके उस अपनी रहमतें बरसाता है। शब-ए-बारात के दिन दुआओं और जरूरतमंदों को दान करने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है।