अब विवाद असली हिंदू कौन

kabir Sharma
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शंकराचार्य ने मांगा सीएम योगी से हिन्दू होने का प्रमाण पत्र, शंकराचार्य से मांगा गया था शंकराचार्य होने का प्रमाण पत्र, बढ़ रहा है विवाद का दायरा

नई दिल्ली। माघ मेले में स्नान को पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का प्रमाण पत्र मांगना योगी सरकार के लिए मुश्किल भरा होता जा रहा है अब शंकराचार्य ने सीएम योगी से उनके हिन्दू होने का प्रमाण पत्र मांग लिया है। इस बीच यह भी जानकारी मिल रही है कि माघ मेले के दौरान हुई घटना को लेकर कुछ बड़े अफसर शंकराचार्य से क्षमा प्रार्थना कर सकते हैं। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से “हिंदू होने का प्रमाण” मांगकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। यह पूरा मामला प्रयागराज के माघ मेले से शुरू हुआ, जहां शंकराचार्य को संगम में स्नान करने से रोके जाने और उनके “शंकराचार्य” पद के प्रमाण-पत्र मांगने पर तनाव बढ़ा। यह विवाद अब “असली हिंदू vs दिखावा करने वाले” की बहस में बदल गया है, जो उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

ऐसे शुरू हुआ विवाद

माघ मेले में शंकराचार्य और उनके अनुयायियों को प्रशासन द्वारा गंगा स्नान में बाधा डालने का आरोप लगा। शंकराचार्य ने इसे अपमान बताया और धरना दिया। प्रशासन ने उनके “शंकराचार्य” टाइटल पर नोटिस जारी किया (सुप्रीम कोर्ट केस के संदर्भ में), जिसे उन्होंने चुनौती दी। प्रयागराज से वाराणसी लौटने के बाद 30 जनवरी 2026 को वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य ने सीधे CM योगी पर हमला बोल दिया और चालिस दिनों के भीतर सीएम योगी को “हिंदू होने का प्रमाण” देने की चुनौती दे डाली।

यह भी बोले शंकराचार्य

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद यही नहीं रुके। उन्होंने कहा कि गाय को “गो-माता” या “राज्य माता/राष्ट्र माता” घोषित करें। उत्तर प्रदेश से गौहत्या पूरी तरह रोकें और गौमांस/बीफ निर्यात बंद करें। उल्लेखनीय है कि भारत से जीतना बीफ एक्सपोर्ट किया जाता है उसमें बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश से जाता है। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि अगर ये शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो शंकराचार्य उन्हें “नकली हिंदू”, “पाखंडी”, “ढोंगी” या “कालनेमि” घोषित कर देंगे। उन्होंने कहा कि भगवा पहनकर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है।

ये दिए गए तर्क

प्रेस कान्फ्रेंस में शंकराचार्य ने जो तर्क दिए वो काफी तीखे थे। उन्होंने बताया कि “मुझसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया, मैंने दे दिया। अब सनातनी समाज मुख्यमंत्री से हिंदू होने का प्रमाण मांग रहा है। हिंदू होने की पहली शर्त गौ-भक्ति है।” हालांकि अभी तक योगी सरकार या CM की ओर से अभी कोई सीधा जवाब नहीं आया है, लेकिन विवाद तेजी से राजनीतिक रंग ले रहा है। कुछ BJP नेताओं/समर्थकों ने इसे राजनीतिक साजिश बताया, जबकि विपक्षी इसे “असली vs नकली हिंदू” की लड़ाई बता रहे हैं। अन्य शंकराचार्यों (जैसे सदानंद सरस्वती) ने अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया है।

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