योगी के आदेश सिर माथे फिर भी दफ्तर में नहीं बैठेंगे, समस्याओं के लिए निगम में धक्के खा रही है महानगर की पब्लिक, कई परिक्रमा के बाद भी नहीं मिलते अफसर
मेरठ। योगी के आदेश सिर माथे फिर भी दफ्तर में नहीं बैठेंगे नगर निगम के अफसर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बार-बार निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी बड़े अधिकारी और फील्ड स्तर के अफसर सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक अपने कार्यालय में अनिवार्य रूप से मौजूद रहें। यह आदेश जनता की समस्याओं की त्वरित सुनवाई और समाधान के लिए जारी किया गया है, ताकि आम नागरिक को सरकारी दफ्तरों में भटकना न पड़े और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित हो, लेकिन निगम के अफसरों की यदि बात करें तो उन्होंने ठान लिया है कि सीएम के आदेश सिर माथे, लेकिन उन्हें मानेंगे नहीं।
कहां गायब हो जाते हैं अफसर
सोमवार को सुबह दस बजे महानगर के अलग-अलग इलाकों से लोग अपने कार्य के लिए नगर निगम पहुंचे, लेकिन अफसर नहीं मिले। इन अफसरों में नगरायुक्त, अपर नगरायुक्त, नगर स्वास्थ्य अधिकारी सरीखे तमाम सीनियर अफसर शुमार हैं। जब सीएम योगी का आदेश है तो फिर सवाल उठता है कि निगम अफसर कहां गायब हो जाते हैं।
गैर मौजूदी है आम बात
सीएम योगी के इस सख्त निर्देश के बावजूद मेरठ नगर निगम के कई अफसर इसकी खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। सुबह 10 से 12 बजे के इस महत्वपूर्ण समय में नगर निगम कार्यालय में अफसरों की अनुपस्थिति आम बात हो गई है। इससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग पानी, सफाई, हाउस टैक्स, अवैध निर्माण जैसी रोजमर्रा की समस्याओं के लिए दफ्तर पहुंचते हैं, लेकिन अफसर नदारद मिलते हैं। इससे जनता का विश्वास प्रशासन पर कम हो रहा है और शिकायतें बढ़ रही हैं। नगरायुक्त से अपनी समस्याओं को लेकर फरियाद करने पहुंचे ब्रह्मपुरी शारदा रोड के कुछ लोगों ने बताया कि “हम सुबह जल्दी उठकर दफ्तर आते हैं, लेकिन अधिकारी 12 बजे के बाद ही दिखते हैं। सीएम योगी जी का आदेश साफ है, लेकिन यहां कोई पालन नहीं हो रहा।”
अफसरों की गैर मौजदूगी का मामला केवल नगर निगम तक सीमित नहीं है। पब्लिक डीलिंग के तमाम सरकारी दफ्तरों का यही हाल है। अफसरों की लापरवाही से जनहित के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में उच्चाधिकारियों को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, जैसे चेतावनी, वेतन कटौती या स्थानांतरण, ताकि सीएम के आदेशों का पालन सुनिश्चित हो। प्रशासन से अपील है कि मेरठ नगर निगम में अफसरों की उपस्थिति पर निगरानी बढ़ाई जाए और जनता की शिकायतों का तुरंत निस्तारण हो।