गल्ला डीलर पर लगाओ लगाम

kabir Sharma
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लालकुर्ती की सस्ता गल्ला दुकान 8/9 पर घटतौली, कालाबाजारी और नियम उल्लंघन के गंभीर आरोप, डीएम, मंडलायुक्त और पूर्ति विभाग से तत्काल जांच की मांग

“गरीबों के हक पर डाका?” लालकुर्ती की राशन दुकान पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप, राशन के लिए लोग हैं भटक रहे

मेरठ में राशन वितरण पर सवाल — घटतौली और पारदर्शिता की कमी का आरोप
सस्ता गल्ला दुकान संख्या 8/9 जांच के घेरे में, कार्ड धारकों का फूटा गुस्सा
राशन में ‘कटौती’ का खेल? प्रशासन से कठोर कार्रवाई की मांग, लालकुर्ती में PDS व्यवस्था पर संकट
लाभार्थियों ने उठाई जांच की मांग

मेरठ। मेरठ कैंट के लालकुर्ती छोटा बाजार स्थित सस्ता गल्ला दुकान संख्या 8/9 के कोटेदार पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। क्षेत्र के कई राशन कार्ड धारकों ने लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जा रहा है और वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है। माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जिलाधिकारी मेरठ, मेरठ मंडल आयुक्त, जिला आपूर्ति अधिकारी, उप नियंत्रक बाट माप तौल विभाग, उप श्रमायुक्त कार्यालय विभाग सहित सम्बंधित विभाग के अफसरों को मेरठ कैंट शिकायतकर्ता सीमा पत्नी परवीन निवासी लालकुर्ती वार्ड 3 द्वारा प्रेषित शिकायत पत्र के अनुसार, यह मामला केवल घटतौली तक सीमित नहीं है बल्कि गेहूं के वितरण में कथित हेरफेर और संभावित कालाबाजारी की आशंका भी जताई गई है। आरोप है कि प्रति यूनिट 5 किलो के स्थान पर 4 किलो राशन दिया जाता है और उसमें भी चावल अधिक देकर गेहूं कम कर दिया जाता है। ऐसा राशन कार्ड धारक / लाभार्थियों का कहना है कि बचाए गए गेहूं को ऊंचे दामों पर बेचे जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, जिसकी उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है। बताया जाता है की

इन्हें भेजी है शिकायत

मामले की शिकायत जिलाधिकारी मेरठ, मंडलायुक्त मेरठ, जिला पूर्ति अधिकारी मेरठ, उप नियंत्रक, बाट एवं माप विभाग, मेरठ, उप श्रमायुक्त कार्यालय, मेरठ को दिए गए शिकायत पत्र मै. राशन कार्ड धारकों के मुख्य आरोप है की प्रति यूनिट निर्धारित 5 किलो के स्थान पर 4 किलो राशन वितरण, जनवरी 2026 में 4 यूनिट पर 20 किलो के बजाय 16 किलो वितरण, ई-पॉस मशीन डेटा और वास्तविक वितरण में अंतर की आशंका, रसीद न देना, बिना मानक बाट-माप के तौल, तौल मशीन का सत्यापन न होना, दर सूची और स्टॉक विवरण प्रदर्शित न करना नियम विरुद्ध है। निर्धारित समय पर दुकान न खोलना मनमर्जी से कार्य करना, और प्रॉक्सी संचालन यानि बिना अनुमति दुकान का स्थान परिवर्तन किया गया है। लाभार्थियों का कहना है कि अंगूठा लगवाकर पूरी मात्रा दर्शाई जाती है, जबकि वास्तविकता में कम राशन दिया जाता है।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ताओं ने आकस्मिक निरीक्षण, स्टॉक मिलान, ई-पॉस डेटा की फॉरेंसिक जांच और दोष सिद्ध होने पर लाइसेंस निरस्तीकरण व आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक शिकायत और धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।

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प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभागों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। अब देखना होगा कि प्रशासन गरीबों के हक की रक्षा के लिए कितनी तत्परता दिखाता है। यहां ऐसे ही राशन कार्ड धारक के साथ घटतौली बेईमानी आदि धांधली बाजी अनियमिताएं सरकारी सस्ता गल्ला दुकान के कोटेदार करते रहेंगे यह देखना अभी बाकि है

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