क्लास और पढ़ाई भगवान भरोसे, मास्टर जी SIR अभियान में, मास्टर जी तो क्लास में बच्चे भी नहीं
मेरठ। कक्षा एक से कक्षा आठ तक के बच्चों की पढाई (SIR) अभियान लील गया है। कक्षा से शिक्षक गायब हैं। उन्हें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने दोहरा संकट खड़ा कर दिया है। बच्चों की पढ़ाई भगवान भरोसे हैं क्योंकि नगरीय क्षेत्र में एक स्कूल पर औसत एक ही शिक्षक है। नगरीय क्षेत्र के स्कूलों का पूरा सिस्टम शिक्षा मित्रों के कंधों पर है लेकिन शिक्षा मित्र व शिक्षक की काबलियत में जमीन आसमान का अंतर होता है, इसलिए यह बात गले नहीं उतरती कि शिक्षा मित्र क्लास संभाल लेंगे। सवाल उठ रहा है – मेरठ के स्कूल से मास्टर जी गायब, तो पढ़ाई कौन कराएगा? और मतदाता सूची से नाम गायब, तो वोट कौन डालेगा
क्लास छोड़कर घर-घर सत्यापन
बच्चों और क्लास व बच्चों की पढ़ाई को छोड़कर बीएसए का फरमान जारी होने के बाद तमाम शिक्षक अब बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की ड्यूटी में घर-घर मतदाता सत्यापन कर रहे हैं, जिससे स्कूलों में क्लासरूम खाली पड़े हैं और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं दूसरी ओर, SIR के तहत जिले में करीब 6.65 लाख मतदाताओं के नाम सूची से कटने वाले हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 24.66% है। इस बीच, शिक्षकों की ड्यूटी से मेरठ के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई ठप्प पड़ रही है। हालांकि राज्य स्तर पर शहरी जिलों जैसे मेरठ, लखनऊ, गाजियाबाद में SIR का असर ज्यादा है, जहां शिक्षक घर-घर फॉर्म भरवा रहे हैं। कई स्कूलों में सिर्फ एक-दो शिक्षक बचे हैं, जिससे बच्चे प्रभावित हैं। शिक्षक संघों का कहना है कि RTE एक्ट के तहत गैर-शैक्षणिक कामों से शिक्षकों को मुक्त रखा जाए, लेकिन चुनाव ड्यूटी अनिवार्य है।
शहरी क्षेत्र का सबसे बुरा हाल
अभियान में सबसे बुरा हाल भी शहरी क्षेत्र जहां नगरीय स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगायी गयी है, का है। बात यदि राज्य स्तर पर करें तो अनुमान के अनुसार 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ नाम कट रहे हैं, लेकिन मेरठ जैसे शहरों में यह प्रतिशत ज्यादा है। मुख्य कारण स्थायी रूप से स्थानांतरण (permanently shifted) हैं – मेरठ में 11.59% मतदाता इस श्रेणी में आए। ASD (Absent, Shifted, Dead) लिस्ट में मेरठ की सभी विधानसभाओं (सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर, किठौर, मेरठ कैंट, मेरठ, मेरठ साउथ) के नाम शामिल हैं। जिला प्रशासन ने ASD लिस्ट ऑनलाइन जारी की है, जहां लोग चेक कर सकते हैं।
ये कर सकते हैं,
जिन मतदातओ के नाम कट गए हैं उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। इसके लिए भी चुनाव आयोग ने प्रावधान किया है। ऐसे मतदाताओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गयी है। दरअसल में ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 दिसंबर 2025 को जारी होगी। अगर नाम कटा है तो 31 दिसंबर से 30 जनवरी 2026 तक दावा-आपत्ति दर्ज करें। फॉर्म-6 (नया नाम जोड़ने), फॉर्म-7 (आपत्ति) या फॉर्म-8 (सुधार) भरें। ऑनलाइन voters.eci.gov.in या मेरठ जिला वेबसाइट meerut.nic.in पर चेक करें। BLO से संपर्क करें या दस्तावेज जमा करें।
विपक्ष ने बताया साजिश
विपक्ष इसे राजनीतिक साजिश बता रहा है, जबकि चुनाव आयोग इसे सूची शुद्धिकरण का जरूरी कदम मानता है। विशेषज्ञों की राय है कि लोकतंत्र मजबूत करने के लिए यह जरूरी है, लेकिन शिक्षा और मताधिकार दोनों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अलग स्टाफ से यह काम कराया जाए तो बेहतर होगा।