नगर निगम से अफसर गायब, पार्षद और पब्लिक मिलने को परेशान, जाएं तो जाएं कहां कोई तो रास्ता बताएं
मेरठ। आपकी कालोनी में या मोहल्ले में पानी की पाइप लाइन फट गयी हो या फिर वहां पर गंदगी के ढेर लगे हों अथवा पानी भर गया हो। समस्या कितनी ही बड़ी क्यों ना हो, अभी नगर निगम आने की जुर्रत ना करें, क्योंकि साहब अभी बिजी हैं। बिजी तो वो पहले से ही चल रहे है, लेकिन इन दिनों ज्यादा बिजी हैं, इसलिए काम कुछ भी क्यों ना हो, निगम आने की हिमाकत बिलकुल ना करें। यह हिदायत केवल पब्लिक ही नहीं बल्कि पार्षदों को भी दी गयी है। पब्लिक की मानिंद पार्षदों की भी अफसरों के ना मिलने की शिकायत है, यह बात अलग है कि शिकायत के बाद भी निगम के अफसर पार्षदों से भी मिलने को तैयार नहीं।
अफसरों को निगम कार्यालय में बैठने से परहेज
नगर निगम अफसरों की यदि बात करें तो वो तो पहले ही निगम स्थित कार्यालय में नहीं बैठा करते थे। उन्हें निगम में बैठने से परहेज है। पिछले करीब एक पखवाड़े से ऐसा ही चल रहा है, अब तो पीएम मोदी की रैली की तैयारियां चल रही हैं। इसी के चलते कर्मचारियों ने अपने काम के लिए निगम अफसरों के पास आने वाले पब्लिक के लोगों से कह दिया है कि 22 फरवरी तक नगर निगम आने की भूल ना करें। तमाम अफसर पीएम की रैली की तैयारियों में व्यस्त हैं। अपने कार्यों के चलते बड़ी संख्या में महानगर के तमाम इलाकों से लोग अफसरों से मिलने के लिए पहुंचते हैं। आमतौर पर वैसे तो किसी भी अफसर के नगर निगम स्थित उनके कक्ष में मिलने की उम्मीद नहीं होती है, लेकिन यदि कोई भूले बिसरे मिल भी जाता था तो अब उनके भी मिलने की उम्मीद खत्म हो गयी है। इसकी वजह निगम के तमाम अफसरों के रैली की तैयारियों में व्यस्त होना बताया जा रहा है। पिछले एक पखवाड़े की यदि बात की जाए तो आमतौर पर अफसरों ेने निगम स्थित अपने कक्षों से दूरी बना ली है।
पार्षदों को भी दर्शन नहीं
केवल आम आदमी ही नहीं बल्कि पब्लिक ने जिन लोगों को चुनकर अपना पार्षद बनाकर नगर निगम में भेजा है उन्हें भी अफसरों के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं। इस संवाददाता को निगम स्थित पार्षद कक्ष में मौजूद तमाम पार्षदों ने बताया कि अफसर जब उन्हें ही नहीं मिलते हैं तो फिर पब्लिक से मिलने की उम्मीद ही रखना बेमाने हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादातर अफसर अपने घरों से ही कार्यालय संचालित कर रहे हैं। यहां तो अफसरों ने आना ही बंद कर दिया है। यदि काम हो तो उनके घर चले जाओ। जब अफसर मिलेंगे ही नहीं तो फिर पार्षद अपने वार्ड की पब्लिक का काम कैसे कराएंगे। इसी वजह से तमाम वार्ड की समस्याएं हल नहीं हो पा रही है। सरवत चौधरी, विपिन जिंदल, संजय सैनी, कीर्ति घोपला, पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार, फजल करीम, निरंजन आदि का कहना है कि बुलाए जाने पर भी अफसर नगर निगम नहीं पहुंचते हैं। पार्षद संजय सैनी तो निगम अफसरों के रवैये से बेहद खिन्न हैं। उन्होंने बताया कि अफसरों के कार्यालय में ना बैठने की शिकायत पीएम के कार्यक्रम के उपरांत वह मंडलायुक्त से करेंगे। पार्षद हो या फिर आम पब्लिक यदि अफसरों से उन्हें मिलना हो तो नगर निगम ही आएंगे, लेकिन जब नगर निगम में अफसर ही नहीं बैठेंगे तो अफसरों से मिलने के लिए उनके घर तो जाया नहीं जाएगा।
सीएम ग्रिड की साइट पर
पार्षदों ने खुलासा किया कि पहले उन्हें बताया जाता फलां साहब सीएम ग्रिड की साइट पर हैं। निगम अफसरों को अरसे से यही रवैया चल रहा था, जिस भी अफसर से मिलना हो उनका स्टाफ यही बताता कि साहब सीएम ग्रिड की साइट पर हैं। पार्षदों का कहना है कि ऐसी क्या आफत आ गयी है कि निगम के सारे अफसर सीएम ग्रिड की साइट पर रहते हैं और जब से पीएम मोदी की रैली का काम शुरू हुआ है तब से बताया जाने लगा है कि तमाम अफसर पीएम रैली की तैयारियों में लगे हुए हैं। रैली के बाद ही वो मिल पाएंगे।