बाल मुनि श्वेत केतु की कथा

kabir Sharma
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गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर सुन्दरकाण्ड के साथ सुनाई बाल मुनि श्वेत केतु की कथा।

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मेरठ। गढ़ रोड स्थित राधा गोविंद मंडप में गोस्वामी तुलसीदास जयंती उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया । सर्वप्रथम गोस्वामी तुलसी दास जयंती पर पंडित दीपक शर्मा के श्री मुख से सुन्दर काण्ड का पाठ हुआ। तत्पश्चात स्वामी अभयानंद जी महाराज को इस युग का तुलसीदास मानते हुए राधा गोविंद मंडप के निदेशक एवं श्रीरामलीला कमेटी मेरठ शहर के अध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता एवं उनकी धर्मपत्नी बबीता गुप्ता द्वारा सपरिवार पूज्य स्वामी अभयानंद सरस्वती जी का पूजन किया गया। इसके बाद परम पूज्य स्वामी अभयानंद सरस्वती जी ने गोस्वामी तुलसी दास के जीवन पर प्रकाश डाला और सभी भक्तों को धर्म और त्याग के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी। मनोज गुप्ता ने बालमुनि की एक छोटी कथा के माध्यम से लोगों को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने बताया एक बाल मुनि श्वेत केतु थे वो भिक्षा मांगते हुए एक घर पहुंचे। जहां एक धर्म प्रयाण स्त्री अपने पति पुत्र एवं अपने ससुर के साथ निवास करती थी। स्त्री ने बड़ी जिज्ञासा के साथ बाल मुनि से कहा कि अभी तो सवेरा है तो बालमुनि ने उत्तर दिया कि काल का क्या भरोसा । बालमुनि श्वेतकेतु उसके जिज्ञासा पूर्ण वचनों से अति प्रभावित होकर पूछने लगे तुम्हारे घर का आचार विचार क्या है स्त्री ने उत्तर दिया कि हमारे यहां तो बासी का ही सेवन किया जाता है बालमुनि श्वेत केतु ने स्त्री से पूछा कि तुम्हारी कितनी आयु है इस पर उसे धर्म परायण स्त्री ने जवाब दिया मेरी आयु 16 वर्ष है बाल मुनि ने कहा कि तुम्हारे पति की क्या आयु है तो उसने जवाब दिया कि 8 वर्ष , बाल मुनि ने पूछा तुम्हारे पुत्र की क्या आयु है तो उस स्त्री ने कहा 4 वर्ष। बाल मुनि ने पूछा कि तुम्हारे ससुर की क्या आयु है इस पर उस धर्म परायण स्त्री ने जवाब दिया कि मेरे ससुर अभी पार्लने में झूल रहें हैं। बाल मुनि श्वेत केतु भिक्षा लेकर वहां से चले गए । तत्पश्चात ससुर ने अपनी पुत्रवधू से कहा कि तुमने यह कैसा गलत वार्तालाप किया है और अनुचित व्यवहार किया है तुम बाल मुनि से कह देना यहां दोबारा न आएं। इस पर पुत्रवधू ने कहा की में किसी को आने से कैसे रोक सकती हूं अगर आपको बाल मुनि को आने से रोकना है तो आप पहाड़ी के पीछे उनके गुरु जी के आश्रम में जाकर बात कर लो। वो वृद्ध बहुत खुश हुआ और बाल मुनि को सबक सिखाने का मन में विचार कर वो वृद्ध आश्रम में जा पहुंचा, और बाल मुनि के गुरुदेव के समक्ष जाकर उस वृद्ध ने कहा कि यह बालमुनि मेरे घर संध्या के समय में आए। और मेरी पुत्र वधु ने इनसे पूछा कि अभी तो सवेरा है इन्होंने उत्तर दिया कि काल का क्या भरोसा इस पर गुरुदेव ने कहा उनका प्रश्न ओर इनका उत्तर बिल्कुल सही था, बालमुनि की आयु देखकर आपकी पुत्रवधू ने कहा कि अभी सवेरा है। इस पर ज्ञानि बालमुनि ने कहा कि काल का क्या भरोसा । । इस पर गुरुदेव की बात उस वृद्ध को समझ आ गई। तभी उसने गुरुदेव से कहा कि महाराज इनका दूसरा प्रश्न था आपका आचार विचार क्या है तो मेरी पुत्र वधु ने जवाब दिया कि हम तो बासी खाते हैं जो मेरी समझ से परे है, इस पर गुरुदेव ने कहा कि आपकी पुत्र वधु ने सही कहा बासी खाने का अर्थ है कि वर्तमान में हमारे यहां धर्म के कार्य नहीं होते, हम अपने पूर्व जन्मों का कर्म भोग रहें हैं । वृद्ध ने दोबारा से महाराज से कहा कि बालमुनि ने ओर मेरी पुत्र वधु ने जो वार्तालाप किया कि मेरी पुत्र वधु की आयु 16 वर्ष और मेरे बेटे की आयु 8 वर्ष इनके पुत्र की आयु 4 वर्ष और मुझे इन्होंने पार्लने में झूलता बताया ये कितना गलत वार्तालाप है इस पर गुरुदेव मुस्कुराए और बोले कि तुम्हारी पुत्र वधु 16 वर्ष से धर्म के पथ पर है और उसके बहुत समझाने पर आपका पुत्र 8 वर्ष से धर्म के पथ पर है और आपका पौत्र अभी 4 वर्ष का है, आप अभी तक पार्लने में ही हो क्योंकि आप अभी तक भी धर्म के मार्ग पर नहीं आ पाए हो। इस पर वो वृद्ध सब कुछ समझ गया। और महाराज को और बालमुनि को नमन करके वहां से चला गया। मनोज जी की इस कथा को सुन सभी भक्तजन भाव विभोर हो गए। तत्पश्चात सभी भक्तों ने भोग प्रसाद ग्रहण किया। इस शुभ अवसर पर पंडित दीपक शर्मा, मनोज गुप्ता, बबीता गुप्ता, आलोक गुप्ता, गोविंद अग्रवाल, वृंदा गुप्ता,देवेंद्र प्रकाश, आर के प्रसाद, मयंक अग्रवाल, अंबुज गुप्ता एवं अन्य भक्तजन उपस्थित रहे।

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