वार्ता को पहुंचे प्राधिकरण एक्सीयन को लौटाया खाली हाथ, वीसी व सचिव मौके आने को नहीं हुए तैयार
मेरठ। लोहिया नगर, गंगा नगर और वेदव्यासपुरी की जमीनों के बकाए प्रतिकरण की मांग को लेकर तीसरों दिन भी गतिरोध बना रहा। मेरठ विकास प्राधिकरण के अफसरों का रवैया मामले को बजाए हल करने के टालने वाला नजर आ रहा है। हैरानी तो उस वक्त हो गयी जब मौके पर पहुंचे एक्सीयन पवन भारद्वाज ने मोबाइल पर आंदोलनकारी नेताओं से बात कराई। बकौल किसान नेता वीसी और सचिव का कहना था कि 8 सितंबर की प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में उनका प्रकरण रखा जाएगा। किसान नेताओं का कहना था कि उपाध्यक्ष व सचिव यह बात आंदोलन स्थल पर आकर किसानों के बीच कह दें, लेकिन उन्होंने वहां आने से इंकार कर दिया तो किसानों ने भी आंदोलन व धरना खत्म करने से इंकार कर दिया। बातचीत में शामिल रहे आंदोलनकारी , नरेश प्रधान एडवोकेट पुट्ठा, हरि प्रकाश बैंसला पुट्ठा, मंगत सिंह पुट्ठा, सतपाल मलियाना, गजेंद्र कुंडा, सुमित डूंगरेली, अनिल चौधरी पुट्ठा, प्रशांत कसना पार्षद कुंडा, सुरेंद्र भड़ाना लोहिया नगर और पौपिन प्रधान लोहिया नगर योजना गांव काजीपुर आदि ने भी वार्ता को आए पवन भारद्वाज को दो टूक कह दिया कि धरना जारी रहेगा। यहां सभी किसान महिला व पुरूष मंडपम के सामने धरने पर बैठे हैं। प्राधिकरण के वीसी व सचिव सरीखे दो बड़े अफसरों की की हठ की वजह से मंगलवार को धरना खत्म होते होते रह गया।
यह है मामला
एडवोकेट व आंदोलन से जुड़े नरेश प्रधान पुट्ठा ने बताया कि साल 2015 में मेरठ विकास प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में तय हो गया था कि प्रतिकर की जो रकम बनती है उसके मूल्य का या तो प्राधिकरण की योजनाओं में प्लाट दे दिया जाएगा या फिर कैश दिया जाएगा। कुछ किसानों को जिनकी रकम छोटी थी उनको प्रतिकरण की रकम देने की कार्रवाई शुरू भी कर दी गई, लेकिन जिन किसानों की प्रतिकर की रकम बड़ी थी उनका मामला तब से अब तक लगातार टाला ही जा रहा है। प्राधिकरण में कई वीसी और सचिव तब से आकर चले गए हैं। लेकिन किसी ने भी किसानों के प्रतिकर के मामले की सुध नहीं ली। जो भी वीसी व सचिव यहां आए उन्होंने केवल तारीख पर तारीख के आंदाज में केवल किसानों को भ्रम में रखने काम किया लेकिन अब इस मुददे पर किसानों ने ठान ली है कि या तो प्रतिकरण की रकम वर्ना धरना जारी। अब तय वीसी व सचिव को करना है कि वो रकम देंगे या फिर वो चाहते हैं कि किसानों का धरना जारी रहे। बार-बार बदल रहे मौसम के विचलित हुए बगैर आंदोलनकारी धरना स्थल पर डटे हुउए हैं। यह देश का दुर्भाग्य है कि अन्नदाता को अपने जायज पैसे के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।
वर्ष 2015 में मेरठ विकास प्राधिकरण एवं किसानों के मध्य हुए समझौते के अनुसार तत्काल मुआवजा/प्लॉट का वितरण प्रारम्भ न किया जाने के कारण व जिन किसानों की आबादी भूमि का पुर्व में गलत तरीके से अर्जन किया गया है और जिस पर पूर्वजों के समय से आवासीय निर्माण/आबादी बनी हुई है, ऐसी भूमि को अर्जन से मुक्त न किया जाने के कारण विवस होकर किसानों को अनिश्चितकालीन धरना शुरू करना पड़ा। वर्ष 2015 में मेरठ विकास प्राधिकरण एवं वेदव्यासपुरी, गंगानगर व लोहियानगर योजना के किसानों के बीच हुए समझौते तथा अन्य लंबित मुद्दों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है। इससे आक्रोशित किसानों की एक महत्वपूर्ण बैठक ग्राम पुट्ठा में धनपाल के आवास पर आयोजित की गई, जिसमें ग्राम पुट्ठा, मलियाना, घाट, डुंगरावली व कुंडा के सभी कृषक उपस्थित रहे। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि यदि प्राधिकरण द्वारा किसानों की जायज़ माँगों का समाधान तत्काल नहीं किया जाता है तो किसान समाज वेदव्यासपुरी योजना अंतर्गत निर्माणाधीन मेरठ मंडपम स्थल पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर निर्माण कार्य रोके जाने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी मेरठ विकास प्राधिकरण की होगी। इसकी जानकारी प्राधिकरण सचिव को दे दी गई। तब से अब तक प्राधिकरण के कई अधिकारी मौके पर आए लेकिन गतिरोध समाप्त नहीं कर पाए। सोमवार को धरना स्थल पर वेदव्यास पुरी, लोहिया नगर व गंगानगर योजना के सभी किसान व सैकड़ो महिलाएं भी शामिल हुई । एमडीए के अधिकारी व पुलिस अधिकारी भी धरना स्थल पर वार्ता हेतु आए परंतु वार्ता असफल रही एमडीए के वीसी व सचिव महोदय ने फोन पर वार्ता की परंतु कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया ।