दुनिया में बदलाव का तूफान, एशिया की घटनाएं दे रही संकेत, इराक से अमेरिका की वापसी, ईरान साऊदी तुर्की चीन हो रहे हैं मजबूत
नई दिल्ली/न्यूयार्क। दुनिया में तेजी से पावर शिफ्टिंग चल रही है। अब अमेरिका सुपर बॉस नहीं रह गया है। रूस की भी पहले जैसी ताकत नहीं है। पावर की यदि बात करें तो वेस्ट से यह ईस्ट की ओर तेजी से बढ़ रही है। दुनिया के सुपर पावर में अब चीन, ईरान, साऊदी अरब और तुर्की जैसे देश शुमार किए जा रहे हैं। पूरे एशिया में बड़े भू-राजनीतिक बदलाव की हवा चल रही है! जनवरी 2026 में दुनिया का पावर सेंटर तेजी से वेस्ट से ईस्ट की ओर शिफ्ट हो रहा है। इसके बड़े साइड इफैक्ट संभव है। और ये साइड इफैक्ट अमेरिका की ओर से होंगे।
अल-असद एयरबेस से वापसी
अमेरिका ने अल-असद एयरबेस इराक से अपनी सेनाओं की वापसी यूं ही नहीं की है। इसके कई चौंकाने वाले परिणाम जल्द ही सामने आने तय माने जा रहे है। अमेरिका ईस्ट में कुछ भी कभी भी कर सकता है। वहीं दूसरी ओर इराकी सरकार ने घोषणा की है कि अमेरिकी सेना ने देश के फेडरल टेरिटरी से पूरी तरह वापसी कर ली है। अल-असद एयरबेस सहित प्रमुख बेस अब इराकी सेना के कंट्रोल में हैं। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी प्रभाव कम होने का साफ संकेत—अब क्षेत्रीय शक्तियां जैसे ईरान, सऊदी अरब और तुर्की ज्यादा मजबूत हो रही हैं। यह एशिया-मिडिल ईस्ट में अमेरिकी रिट्रीट का बड़ा कदम है। हालांकि इसके पीछे किसी बड़ी विध्वंसक घटना की आशंका भी जतायी जा रही है।
यूरोप का अमेरिका को जोर का झटका धीरे से
ग्रीनलैंड और दूसरे कई मसाइल पर यूरोपियन कंट्रीज ने अमेरिका को वो झटका दिया है जिसकी उम्मीद प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंपक को कभी नहीं रही थी। ट्रंप की ग्रीनलैंड खरीदने की मांग और उस पर टैरिफ थोपने की धमकी से यूरोप भड़क गया। यूरोपीय संसद ने यूएस-ईयू ट्रेड डील को अनिश्चितकाल के लिए फ्रीज कर दिया। डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी समेत कई देशों ने ट्रंप की नीतियों को “खतरनाक” बताते हुए रिटेलिएटरी टैरिफ की तैयारी की। यूरोपीय लीडर्स ने कहा कि यह “सभ्यतागत गिरावट” की तरफ ले जा रहा है। नाटो में भी तनाव—यूरोप अब अमेरिका पर कम निर्भर होने की बात कर रहा है। हालांकि जो ट्रंप का मिजाज करीब से जानते हैं उनका कहना है कि ट्रंप यूं ही चुप होकर बैठने वालों में से नहीं। वो जरूर बैक फायर करेंगे।
चीन के लिए ओपन स्पेस
जो कुछ घटनाक्रम चल रहा है उसका सीधा फायदा चीन को होने जा रहा है। हालांकि चीन सैन्य शक्ति के मामले में एशिया में किसी से भी कम नहीं है, लेकिन चीन का मकसद बाजारों पर कब्जा करना है वो इसमें कामयाब भी हो रहा है। BRICS और SCO जैसे ग्रुप मजबूत हो रहे हैं, जहां एशियाई देश डॉलर से दूर हटकर नई सिस्टम बना रहे हैं। साउथईस्ट एशिया में ASEAN 2026 में फिलीपींस की अगुवाई में बैलेंसिंग गेम खेल रहा है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में ग्लोबल ऑर्डर में “मल्टी-पोलर” दुनिया पूरी तरह सामने आएगी—अमेरिका वेस्टर्न हेमिस्फियर पर फोकस करेगा, जबकि एशिया चीन-रूस-इंडिया के इर्द-गिर्द नया सेंटर बनेगा। पूर्वी एशिया में US-चाइना टेंशन स्थिर लेकिन ताइवान, साउथ चाइना सी में खतरा बरकरार। कुल मिलाकर दुनिया में नया युग शुरू हो रहा है।