शहर की सफाई में नहीं कोई सुधार

kabir Sharma
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प्रभारी मंत्री व प्रमुख सचिव जता चुके हैं नाराजगी, नगरायुक्त के दौरे के बाद भी हालात जस के तस, हापुड़ रोड, लिसाड़ी रोड, नौचंदी का बुरा हाल

मेरठ। जिले के प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह और प्रमुख सचिव नगर विकास की कड़ी नाराजगी के बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था पटरी पर आती नजर नहीं आ रही है। शहर के पुरानी आबादी वाले इलाकों खासतौर से लिसाड़ी रोड और हापुड़ इलाके के आसपास के मोहल्लों में सफाई का सबसे बुरा हाल है। पिछले दिनों नगरायुक्त के पुराना कमेला हापुड़ के निरीक्षण के बाद साफ सफाई की कुछ उम्मीद बंधी थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। ना कूडे और कचहरे के पहाड़ हटाए गए ना लोगों को राहत दी जा सकी।

निगम की बनी है लापरवाही नगर निगम की सफाई व्यवस्था को लेकर लापरवाही के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। पार्षदों व पूर्व पार्षदों खासतौर ने अब्दुल गफ्फार की शिकायत है कि नालों और नालियों की सफाई के नाम पर कर्मचारी गंदगी निकालकर उसे सड़कों पर ही डाल देते हैं, जिससे दुर्गंध फैलती है, मच्छर पनपते हैं और बीमारियां बढ़ रही हैं। कई इलाकों में नाले सिल्ट और कूड़े से अटे पड़े हैं, लेकिन सफाई के बाद भी गंदगी सड़कों पर बिखरी रह जाती है। एक दिन पहले शिव सेना के कार्यकर्ताओं ने भी नगरायुक्त से मिलकर शिकायत दर्ज करायी थी।

यहां ज्यादा समस्या

हापुड़ रोड, लिसाड़ी रोड, और नौचंदी क्षेत्र के अलावा तमाम वार्डों जैसे श्रद्धापुरी, कसेरूखेड़ा, माधवपुरम, भगवतपुरा, फ्रेंड्स कॉलोनी और शास्त्रीनगर में यह समस्या सबसे ज्यादा है। निवासियों का कहना है कि सफाई कर्मचारी नालों से कूड़ा निकालते हैं, लेकिन उसे उठाकर ले जाने की बजाय सड़क किनारे फेंक देते हैं। बारिश के मौसम में यह गंदगी सड़कों पर फैल जाती है, जिससे जलभराव और कीचड़ की समस्या बढ़ जाती है। सपा के अफजाल सैफी ने बताया, “नाले की सफाई होती है तो गंदगी सड़क पर डाल दी जाती है, फिर दिनों तक कोई उठाने नहीं आता। बदबू से सांस लेना मुश्किल हो जाता है।”

फटकार का भी असर नहीं

2025 में भी कई मामलों में प्रमुख सचिव नगर विकास ने नालों की गंदगी पर अधिकारियों को फटकार लगाई थी, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी मेरठ नगर निगम पर लिगेसी वेस्ट और अनियंत्रित डंपिंग को लेकर सख्त टिप्पणियां की हैं। उपभोक्ता शिकायतों के पोर्टल पर दर्जनों कंप्लेंट्स हैं, जहां लोग नालियों की सफाई न होने और गंदगी सड़कों पर फैलने की बात कह रहे हैं।

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कंट्रोल रूम में नहीं करते रिसीव काल

यूं कहने को निगम प्रशासन ने कंट्रोल रूम का दावा करता है, लेकिन आरोप है कि कंट्रोल रूम पर कभी भी कॉल रिसीव नहीं की जाती। यह भी दावा है कि सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं और व्हाट्सएप नंबर पर शिकायत करने पर तुरंत कार्रवाई होती है। प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने सफाई निरीक्षकों को लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात नहीं सुधर रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों की कमी, पर्यवेक्षण की कमी और उचित डंपिंग साइट्स न होने से यह समस्या बनी हुई है। शिवसेना के प्रदेश महामंत्री धर्मेंद्र व सपा के अफजाल तथा बेगमपुल व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष पुनीत शर्मा का कहना है कि सफाई के दौरान गंदगी को तुरंत उठाया जाए, नियमित निगरानी हो और जुर्माना लगाकर लापरवाही रोकी जाए। अन्यथा डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाएगा।

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