

बदहाल है शहीद के नाम पर बना पार्क, पार्क के चारों तरफ हैं गंदगी, कबाडियों ने कर लिए हैं अवैध कब्जे, बदहाल है वीर अब्दुल हमीद पार्क
मेरठ। मुल्क के लिए जान कुर्बान करने वाले वीर अब्दुल हमीद ने कभी सोचा नहीं होगा कि उनके नाम पर प्रथम स्वतंत्रा संग्राम के गवाह रहे मेरठ जैसे एतिहासिक और पौराणिक शहर में उनके नाम पर बनाया गया वीर अब्दुल हमीद पार्क को बदहाल कर दिय जाएगा और अफसर उसकी अनदेखी और बर्बादी के लिए जिम्मेदार होंगे। ऐसा नहीं कि केवल कैंट बोर्ड ही उसकी बर्बादी के लिए जिम्मेदार कहलाएगा, नगर निगम, प्रशासन और पुलिस के अफसर भी इसके लिए उतने ही जिम्मेदार होंगे जितने कि बाकि अफसरान।
ऐसा बना दिया है हाल
पार्क के स्थान पर कूड़े के ढेर, नशेड़ियों का भी कब्ज़ा मेरठ। ‘अब उसी जिंदादिली से यह वतन आबाद है, तू सुपुर्द ए खाक तेरा नाम जिंदाबाद है’। वतन पर मिटने वाली जिस अज़ीम शख्सियत को सुपुर्द ए खाक होने के बाद ता-कयामत जिंदाबाद का ‘लक़ब’ मिला, अब उसी लक़ब को मेरठ कैंट बोर्ड प्रशासन मिट्टी में मिलाने पर तुला है। पाकिस्तान के साथ 1965 की जंग में उसके अजय समझे जाने वाले 9 पैटन टैंको को अकेले नष्ट करने वाले परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद की स्मृति में बनाया गया पार्क आज अपनी बदहाली पर ज़ार ज़ार है। यहां नेताजी हकीमुद्दीन मार्ग स्थिति जली कोठी के मुहाने पर बने वीर अब्दुल हमीद पार्क को अब कैंट बोर्ड की तवज्जो की दरकार है। न जाने क्या सोच कर ‘हाकिमों’ ने ढलाव घर बनवा दिया। ढलाव घर बनने से पार्क तो उजड़ा ही साथ ही साथ एक प्रकार से क्रांतिकारियों की यादों की तिलांजलि दे दी गई। शहर के राजनीतिज्ञ और बुद्धिजीवी इससे बहुत आहत हैं। पूर्व विधायक हरेंद्र अग्रवाल और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. युसूफ कुरैशी ने शहीदों को उनका हक वापस दिलाने का बीड़ा उठाया है।
रक्षा मंत्री से मिलेंगे कांग्रेसी
इस पार्क के सौंदर्यीकरण को लेकर डॉ. यूसुफ कुरैशी और हरेंद्र अग्रवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात का खाका तैयार कर रहा है। यह प्रतिनिधिमंडल इस पार्क की बदहाली और शहीदों के अपमान से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को अवगत कराएगा।