कुचला जा रहा है प्रदर्शन, हजारों की अब तक हो चुकी मौत, खोमनी की जेलों में पशुओं की तरह भर दिए प्रदर्शनकारी, सबसे बुरा हाल महिला प्रदर्शनकारियों का
नई दिल्ली/तेहरान। ईरानी सरकाार अब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ क्रूर दमन की नीति पर उतर आयी है। पहचान कर प्रदर्शनकारियों को रूह कंपा देने वाली सजा दी जा रही है। सबसे ज्यादा निर्ममता महिलाओं के साथ की जा रही है। सजा देने के साथ ही उनको अपमानित किया जा रहा है। कई के साथ यौन हिंसा तक की जा रही है। यह मंजर वाकई दुनिया भर के लिए डरावना है। आर्थिक संकट, महंगाई, बेरोजगारी और धार्मिक तानाशाही के खिलाफ शुरू हुए इन प्रदर्शनों को ईरानी शासन ने बेहद क्रूर तरीके से कुचलने की कोशिश की है। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक करीब पांच हजार प्रदर्शनकारियों को मार दिया गया है। भारत ने ईरान में फंसे अपने नागरिकों की निकासी की तैयारी शुरू कर दी है।
जारी है इंटरनेट ब्लैक आउट
राजधानी तेहरान समेत पूरे ईरान में इंटरनेट ब्लैक आउट जारी है। दुनिया से ईरान का संपर्क कट गया है। इतना ही नहीं मीडिया पर भी बुरी सख्त की गयी है। इंटरनेशलनल संचार पूरी तरह बंद हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि सुरक्षा बलों ने गोलीबारी, गिरफ्तारियां और टॉर्चर बढ़ा दिया है। अमेरिका-आधारित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने इसे “ईरान की सबसे बड़ी क्रांति” करार दिया है, जहां युवा पीढ़ी अब डर नहीं मान रही। प्रदर्शनकों को ईरान की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है, जो पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला सकता है। अगर प्रदर्शन जारी रहे तो यह “ईरानी वसंत” या बड़ा उलटफेर बन सकता है।
जारी हैं प्रयास
ईरान में अमन के लिए दुनिया के तमाम देशों और संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयास भी जारी हैं। सुरक्षा परिषद में ईरान के हालत के हालात पर एक खास मिटिंग हुई है। इसमें मेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने स्थिति पर चर्चा की। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 2026 की प्राथमिकताओं में ईरान संकट को प्रमुख बताया। वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार संगठन और सरकारें ईरानी शासन पर दबाव बढ़ा रही हैं, लेकिन रूस और चीन जैसे देश चुप हैं।