दोनों देश नहीं चाहते युद्ध हो, फिर भी युद्ध को टाला जाना नहीं लग रहा आसान, ईरान लगातार दे रहा अमेरिका को चेतावनी
नई दिल्ली/तेहरान/न्यूयार्क। अमेरिका काफी करीब तक पहुंच गया है। उसका बेडा किसी भी वक्त ईरानी जल सीमा में प्रवेश कर सकता है, वहीं दूसरी ओर किसी भी हालात से निपटने के लिए ईरान भी तैयार है। ईरानी सरकार के विदेश मंत्री बार-बार कह रहे है कि अमेरिका की कोई भी हिमाकत इजरायल को भारी पड़ेगी। इसके अलावा अरब में जितने भी अमेरिकी मित्र देश हैं उन्हें भी अमेरिकी हमले की कीमत चुकानी होगी। दोनों ही देश युद्ध नहीं चाहते, लेकिन युद्ध यदि गले आ पड़ा तो उससे निपटने में भी कोई गुरेज नहीं करेंगे। दरअसल ईरान के लिए साऊदी अरब की यूएस को एयर स्पेस देने की घोषणा बड़ा झटका मानी जा रही है।
अब्राहम लिंकन पहुंचा
ईरानी जल सीमा के करीब युद्धक विमान वाहक पोत अब्राहम लिंकन के पहुंचने की गंभीरता को ईरान भी समझ रहा है। ईरान के धार्मिक नेता भी इसके लिए खुद को पूरी तरह से तैयार रखे हैं, हालांकि ईरानी सरकार के स्तर से केवल युद्धक तैयारी नहीं की जा रही है बल्कि कुटनीतिक स्तर पर भी कई देशों से वार्ता की जा रही है ताकि युद्ध की नौबत ना आए। अमेरिका भी जानता है कि युद्ध उसके लिए काफी बड़ा नुकसान का सौदा साबित होगा, इसलिए तमाम नाजुक हालातों के बावजूद ईरान पर युद्ध से परहेज ही किया गया। ईरान में हुए देश व्यापी प्रदर्शनों के दौरान जब रजा पहलवी चाहते थे कि अमेरिका ईरान पर हमला करे तब भी युद्ध को टाला गया। और कोई गलती नहीं की गयी।
हॉट लाइन एक्टिवेट
हालांकि युद्ध के हालात को देखते हुए ईरान की हॉट लाइन एक्टिवेट है। कई देशों के साथ उसकी वार्ता जारी है। ये वो देश बताए जा रहे हैं जिन्हें अमेरिका अपना मित्र देश कहता है। वहीं दूसर ओर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान का वॉर-रूम पूरी तरह एक्टिव बताया जा रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि युद्ध के परिणाम उसके देश के लोगों के लिए घातक साबित होंगे। अब यह अमेरिका को तय करना है कि उसको युद्ध चाहिए या अमेरीकियों की सुरक्षा। युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है, लेकिन जो हालात नजर आ रहे हैं उनमें यह भी नहीं कहा जा सकता कि युद्ध नहीं होगा। लेकिन यदि युद्ध होता है तो यह इसको व्यापक होने में देर नहीं लगेगी। चीन और रूस पहले से ही इसके लिए खुद को तैयार किए हैं।