कौन है ठहरा आशियाना में फाइलों से कहीं..

kabir Sharma
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कैंट बोर्ड के पूर्व सीईओ हैं नागेन्द्र, ठहरे डोर टू डोर मामले में रहे थे चर्चित, डायरेक्टर मध्य कमान डीएन यादव ने पकड़े थे बैकडेट में साइन के पेपर,

साल 2025 में डीजी डिफैंस से शिकायत के बाद लग गयी थी रिटायर्ड हो चुके सीईओ पर कैंट बोर्ड में एंट्री पर रोक

मेरठ। माल रोड स्थित कैंट बोर्ड का आशियाना गेस्ट हाउस इन दिनों कैंट बोर्ड और डीईओ ऑफिस के स्टाफ में खासा चर्चित है। सुनने में आया है कि कैंट बोर्ड के डोर टू डोर घोटाले में फंसे और जीओसी लखनऊ के डायरेक्टर डीएन यादव की जांच में घपले घोटाले में शामिल पाए गए रिटायर्ड हो चुके सीईओ नागेन्द्र नाथ जो मिनिस्ट्री से एक्सटेंशन चाहते थे लेकिन मिला नहीं था, इन दिनों आशियाना गेस्ट हाउस में डेरा डाले हैं। और कोशिश की गयी थी कि उनके यहां ठहरने की भनक किसी को ना लग पाए लेकिन एक पुरानी कहावत है कि सत्य कहां छिपता है। वैसा ही इस मामले में भी हुआ है। जानकारों की मानें तो नागेन्द्र नाथ की आशियाना में मौजूदगी की सच्चाई छिप नहीं सकी और स्टाफ को ना केवल पता चल गयी बल्कि यह भी सुगबुगाहट है कि ऐसी क्या आफत आ गयी है जो आशियाना में ठहराना पड़ गया। रिटायर्ड होने के बाद यदि ठहरना ही था तो मेरठ में तमाम होटल हैं जहां ठहरा जा सकता था, लेकिन सवाल यह कि आशियाना ही क्यों। कुछ तो है जिसकी पर्दादारी की जा रही है।

कैंट बोर्ड में एंट्री पर रोक

नागेन्द्र नाथ पर साल 2025 में कैंट बोर्ड में एंट्री पर रोक लग गयी है। दरअसल हुआ यह है कि रिटायर्ड होने के अरसे बाद साल 2025 में नागेन्द्रनाथ ने एकाएक कैंट बोर्ड में आना जाना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं उन्होंने कुछ फाइलें भी खंगालनी शुरू कर दीं। इसकी शिकायत डीजी डिफैंस और जीओसी सरीखे बड़े अफसरों से की गयी, जिसके बाद नागेन्द्र नाथ की कैंट बोर्ड में एंट्री बैन कर दी गयी। साल 2020 में कैंट बोर्ड में बतौर सीईओ ज्वाइन करने वाले नागेन्द्र नाथ पर आरोप थे कि उन्होंने डोर टू डोर ठेके में ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए कैंट बोर्ड को पचास लाख से ज्यादा का चूना लगा दिया। यह बात डीएन यादव की जांच में साबित भी हो गयी थी। कुछ पेपर उन्होंने ऐसे पकड़े थे जिन पर बैकडेट में साइन किए गए थे।

बोर्ड बैठक में मैंबरों ने किया था विरोध

आगरा की अग्रवाल एंड कंपनी को डोर टू डोर कलेक्शन का ठेका दिया गया था। यह ठेका 18.57 लाख में दिया गया था। लेकिन साल 2021 की एक बोर्ड बैठक में तत्कालीन उपाध्यक्ष विपिन सोढी और मैंबरों के विरोध के बाद ठेके की रकम 18.57 से घटा कर 15.60 लाख प्रतिमाह कर दी गयी।

बैकडेट में बढ़ा दी ठेके की रकम

डाेर टू डोर ठेके की रकम जब बोर्ड के सदस्यों व उपाध्यक्ष के विरोध के बाद 15.60 लाख प्रति माह कर दी गयी तो बाद में जब जुलाई 2021 को जब बोर्ड भंग हो गया तो उस रकम दोबारा 18.57 लाख कर दिए जाने के आरोप नागेन्द्र नाथ पर लगे। आरोप ही नहीं लगे ऐसा किया भी क्या क्योंकि डीजी डिफैंस के निर्देश पर जब जीओसी लखनऊ से डायरेक्टर डीएन यादव मेरठ कैंट में जांच के लिए आए थे तो उन्होंने ऐसे पेपर पकड‍़े जो कंप्यूटर में टाइप तो जुलाई और अगस्त माह में हुए थे, लेकिन उन पर साइन बैकडेट यानि मार्च माह में किए गए थे। जांच में पेज नंबर 239 ऐसा ही बताया जाता है, जिस पर माह मार्च साल 2021 तारीख डाल कर नागेन्द्र नाथ ने साइन किए हैं।

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ये घपला घोटाला पकड़े जाने के चलते ही नागेन्द्र नाथ को एक्सटेंशन नहीं मिल पाया था। बताया जाता है कि कुछ पेपर फाइलों में ऐसे रह गए थे जिनको बैकडेट में साइन किया जाना जरूरी था, ऐसा ना किए जाने के चलते कैंट बोर्ड के स्टाफ के कुछ लोगों की गर्दन फंस सकती थी। कहा जा रहा है कि उसी को ठीक करने के लिए नागेन्द्र नाथ आशियाना में डेरा डाले हुए हैं। जब डेरा डाले हुए है तो लाजमी है कि फाइलों को भी खंगाल रहे होंगे। अकारण तो आशियाना में ठहरने का कोई मतलब नहीं।

सीसीटीवी नहीं

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात है कि माल रोड स्थित आशियाना गेस्ट हाउस के सीसीटीवी हटवा दिए गए हैं। इसके पीछे मंशा क्या यह तो नहीं बतायी जा सकती, लेकिन सीसीटीवी ना होने की वजह से नागेन्द्र नाथ की मौजूदगी की जरूर छिपा ली जाएगी। इस संबंध में सीईओ कैंट और कैंट बोर्ड के प्रवक्ता ओएस जयपाल तोमर से जानकारी मांगी गयी लेकिन उत्तर नहीं मिला, लेकिन इतना तो तय है कि आशियाना में जो भी कोई ठहराता है उसकी जानकारी बोर्ड अफसरों को ना हो ऐसा हो नहीं सकता।

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