मेरठ। दो दिन पहले शहर में जिस जल भराव को कमिश्नर व डीएम का गंदे पानी में उतरना पड़ा उस सारे फसाद की जड़ तो शहर में चल रहीं अवैध डेयरियां हैं। हाईकोर्ट की फटकार व सख्त लहजे के बाद भी शहर व कैंट में अवैध डेयरियों को लेकर अधिकारियों का गंभीर ना होना डेयरियों के चलते से भी कोताही है। साल 2016 में डेयरियों को लेकर हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद तत्कालीन मुख्य सचिव ने अभियान चलाकर तीन महीने में डेयरियों को शहर से बाहर निकालने की जिम्मेदारी प्रदेश भर के जनपदों के डीएम को सौंपी थी, लेकिन मुख्य सचिव के उस आदेश पर कितना काम हुआ यह शहर के नालों में जमा डेयरियों से गोबर से समझा जा सकता है और रही सही कसर नालों की सफाई ने पूरी कर दी। वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट के आदेश के बाद तत्कालीन मुख्य सचिव ने यह भी आदेश दिया कि डीएम, एसएसपी तथा नगर आयुक्त आपस में समन्वय बनाएंगे। शिफ्टिंग के बाद फिर से डेयरी चलती मिलने पर थाने के एसओ तथा निगम के जोनल अधिकारी जिम्मेदार होंगे, लेकिन महानगर में कितनी डेयरी हटाई गई और नगर निगम ने पुलिस से कितना सहयोग मांगा, यह शहर में अवैध रूप से चल रहीं करीब 21 हजार डेयरियों से साफ है।
दूध निकाल कर हैं छोड़ देते पशु
गली में पशु डेयरियां चल रही हैं, जिनमें दूध निकालने के बाद पशुओं को सड़कों पर आवारा घूमने के लिए छोड़ दिया जाता है, जबकि गली-गली में आवारा पशु घूमते हैं। डेयरियों से निकलने वाला गोबर व गंदगी शहर के लिए मुसीबत बनी है। इसके अलावा ये आवारा पशु सड़क हादसों का कारण बन रहे हैं। समस्याओं के समाधान को लेकर भी हाईकोर्ट ने साल 2016 में अपने आदेश में स्पष्ट किया था। तत्कालीन मुख्य सचिव ने तब सभी मंडलायुक्त, डीएम, एसएसपी, नगर आयुक्त तथा निगम नगरायुक्तों व नगर पालिकाओं के ईओ के लिए सख्त आदेश जारी किया है। मुख्य सचिव ने कहा है कि तीन महीने के भीतर अभियान चलाकर शहर में चलने वाली डेयरियों तथा आवारा पशुओं को शहर से बाहर किया जाए। तीन माह के बाद शहर में न डेयरी चलती मिले और न ही आवारा पशु घूमें। शहर के बाहर कैटिल कालोनी स्थापित करने की जिम्मेदारी नगर निगम, विकास प्राधिकरण तथा आवास विकास परिषद को जारी किए गए हैं। डीएम इस अभियान की समीक्षा करेंगे। एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की समिति कार्रवाई करके रिपोर्ट डीएम के सामने पेश करेगी। एक बार शिफ्ट किए जाने के बाद फिर से यदि डेयरी चलाई जाती है तो डेयरी संचालक के विरुद्ध दंडात्मक और विधिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही निगम के जोनल अधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी तथा थानाध्यक्ष व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। डीएम, एसएसपी तथा नगर आयुक्त समन्वय बनाकर यह अभियान चलाएंगे।
शहर के इन इलाकाें में चल रहीं हैं डेयरियां
कैंट के तोपखाना, लालकुर्ती, थाना सदर बाजार के पीछे, सदर कलाल खाना, रजबन, डेयरी फार्म आदि इलाकों में अवैध डेयरियां संचालित हैं। हैरानी तो यह है कि इन सभी इलाकों से डेयरियां हटाई जा चुकी हैं। उसकी रिपोर्ट भी संबंधित अधिकारियों को भेजी जा चुकी है, लेकिन उसके बाद भी डेयरियां चल रही हैं, जबकि शहर के आबू मकबरा, गोला कुंआ, शोहराब गेट, भगत सिंह मार्केट, शास्त्री नगर का पूरा क्षेत्र, मेडिकल का मंशा देवी इलाका, इस्माइल नगर, बुढानागेट का खत्ता रोड, जलीकोठी, नंगला बट्टू, लिसाड़ रोड, तारापुरी, ऊंचा व नीचा सद्दीक नगर, हापुड़ रोड, प्रहलाद नगर, इस्लामाबाद, विकासपुरी समेत पूरे शहर के कई इलाके जो अवैध डेयरियों व गंदगी से बुरी तरह बजबजा रहे हैं। इनमें से कितने इलाकों से डेयरियां हटायी गयी हैं, इसको लेकर निगम प्रशासन भले ही कुछ भी दावा करे, लेकिन ओडियन नाला, घंटाघर नाला, बच्चा पार्क नाला, जलीकोठी नाला, थापर नगर नाला, आबूलाना और काली नदी में गिरने वाला पुराने कमेले के आगे से बहने वाला गंदा नाला आदि में जमा गोबर यह बताने को काफी है।
भाजपाई ही मिले थे निगम प्रशासन को
शहर से गोबर उठवाने और गोशाल का ठेका देने के लिए नगर निगम को क्या भाजपाई ही मिले जबकि जिन्हें ठेका दिया गया, उनका इस काम से कुछ भी लेना देना नहीं सिर्फ भाजपाई होना तो किसी काम की काबलियत नहीं। शहर से कितना गोबर उठाया जा रहा है यह नाले बताने को काफी हैं, लेकिन जिन्हें ठेका दिया गया है, उन्हें भुगतान पूरा किया जा रहा है। जहां तक कान्हा उपवन का सवाल है तो करीब पांच छह दिन पहले कान्हा उपवन गोशाला में गोवंशों की दुर्दशा व एक मृत गोवंश को कुत्तों द्वारा नोचते देखकर ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। परतापुर निवासी चिराग चौधरी ने बताया कि वह सुबह अपने खेत पर चारा लेने जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि गोशाला की चाहरदीवारी से कुछ दूरी पर उनके ही खेत में मृत गोवंश को कुत्ते नोच रहे थे। किसान ने कुत्तों को भगाने का प्रयास भी किया, लेकिन वह उसे ईख के खेत में ले गए। जानकारी पर गांव के लोग वहां पर पहुंचे। लोगों ने वीडियो बनाई और हंगामा किया। ग्रामीणों ने बताया कि गोशाला से निकलने वाला गोबर आदि को निगम के कर्मचारियों द्वारा पास में स्थित परतापुर बराल गांव के श्मशान की भूमि में डाला जा रहा है। जिसको लेकर भी ग्रामीणों ने गोशाला पहुंचकर निगम के खिलाफ नारेबाजी की। चेतावनी दी कि अगर श्मशान घाट में गंदगी डालना बंद नहीं किया तो ग्रामीण धरना प्रदर्शन करेंगे। एक अन्य नितेश चौधरी ने बताया कि गोशाला के बाहर गांव का श्मशान है। कई दिनों से यहां गोशाला से निकला गोबर और मलमूत्र डालकर श्मशान की भूमि पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। अगर किसी को अंतिम संस्कार के लिए यहां लाया जाएगा तो परेशानी होगी।
क्या कहना है जनप्रतिनििधयों व अफसरों का
राज्यसभा सांसद डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का कहन है कि प्रमुख सचिव ने मोहनपुरी नाले की दुर्दशा पर कठोर नाराजगी जताई थी, उसके बाद भी निगम अफसरों की नींद नहीं टूटी, कमिश्नर और डीएस को उन्होंने चार लाइन का वाट्सएप मैसेज किया था तब वो शहर की सड़कों पर उतरे।
सांसद अरुण गोविल इन दिनाें लोकसभा के सत्र में शामिल होने के चलते दिल्ली गए हुए हैं, लेकिन उनके सचिव ने बताया कि जो कुछ शहर की हालत है वह स्वीकार्य नहीं है। सांसद होते तो वह भी यही प्रतिक्रिया देते।
भाजपा नेता अरुण वशिष्ठ पहले ही महापौर को पहले ही आइना दिखा चुके हैं, उन्होंने कहा कि होना यह चाहिए था कि कमिश्नर के सड़कों पर उतरने के बाद हरिकांत अहूवालिया को भी सड़कों पर उतरना चाहिए था, लेकिन वह घर से भी नहीं निकले। हालांकि यह बात अलग है कि चहूं और आलोचना के बाद महापौर एक दिन पहले निगम की गोशाला पहुंचे और की वहां दशा पर नाराजगी भी जताई।
इस समस्या को लेकर जनप्रतिनियों का कहना है कि इस सारे फसाद की जड़ अवैध डेयरिया हैं।
मुसीबत बना है कान्हा उपवन
कान्हा उपवन गोशाला में गोवंशों की दुर्दशा व एक मृत गोवंश को कुत्तों द्वारा नोचते देखकर ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। परतापुर निवासी चिराग चौधरी ने बताया कि वह सुबह अपने खेत पर चारा लेने जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि गोशाला की चाहरदीवारी से कुछ दूरी पर उनके ही खेत में मृत गोवंश को कुत्ते नोच रहे थे। किसान ने कुत्तों को भगाने का प्रयास भी किया, लेकिन वह उसे ईख के खेत में ले गए। जानकारी पर गांव के लोग वहां पर पहुंचे। लोगों ने वीडियो बनाई और हंगामा किया। ग्रामीणों ने बताया कि गोशाला से निकलने वाला गोबर आदि को निगम के कर्मचारियों द्वारा पास में स्थित परतापुर बराल गांव के श्मशान की भूमि में डाला जा रहा है। जिसको लेकर भी ग्रामीणों ने गोशाला पहुंचकर निगम के खिलाफ नारेबाजी की। चेतावनी दी कि अगर श्मशान घाट में गंदगी डालना बंद नहीं किया तो ग्रामीण धरना प्रदर्शन करेंगे। एक अन्य नितेश चौधरी ने बताया कि गोशाला के बाहर गांव का श्मशान है। कई दिनों से यहां गोशाला से निकला गोबर और मलमूत्र डालकर श्मशान की भूमि पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। अगर किसी को अंतिम संस्कार के लिए यहां लाया जाएगा तो परेशानी होगी। अमित सिरोही का कहना कि गोशाला से निकलने वाले गोबर और मलमूत्र को जगह जगह डाल दिया गया। बरसात के मौसम में इससे दुर्गंध उठती है। अजय सिंह ने कहा कि जब से गांव में गोशाला बनी है। ग्रामीण मुसीबत झेल रहे हैं। गोशाला में आने जाने वाले वाहनों के कारण परतापुर महरोली मार्ग क्षतिग्रस्त हो चुका है। आए दिन यहां बाइक सवार गिरकर चोटिल होते हैं
सड़कों पर आवारा पशु:छावनी क्षेत्र में आवारा पशुओं की वजह से अक्सर हादसे होते रहते हैं, खासकर मॉल रोड पर।
अतिक्रमण:डेयरी फार्मों और अन्य अतिक्रमणों के कारण छावनी क्षेत्र में परेशानी हो रही है। आवारा पशुओं को पकड़ना:छावनी परिषद ने आवारा पशुओं को पकड़कर गोशाला में भेजना शुरू कर दिया है।
अतिक्रमण हटाना:छावनी परिषद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रही है, और ठेला लगाने वालों को चेतावनी दी गई है।
डेयरी फार्मों के खिलाफ कार्रवाई:छावनी परिषद डेयरी फार्मों के खिलाफ भी कार्रवाई कर रही है और डेयरी संचालकों को पशुओं को सरकारी स्थान पर रखने के लिए कहा गया है। यह अभियान छावनी क्षेत्र को साफ-सुथरा और सुरक्षित बनाने के लिए चलाया जा रहा है वनी परिषद ने रजबन क्षेत्र में डेरी हटाओ अभियान चलाया। राजस्व अधीक्षक राजेश जॉन के नेतृत्व में टीम ने क्षेत्र से 6 आवारा गायों को पकड़कर नगर निगम की गोशाला भेजा। उन्होंने डेरी संचालकों को नोटिस भी दिए, कहा कि यदि 10 दिनों में डेरी नहीं हटाई गई तो बुल डोजर कार्रवाई की जाएगी। मुख्य अधिशासी अधिकारी जाकिर हुसैन के निर्देश पर यह अभियान रजबन पेट्रोल पंप से शुरू किया गया। डेरी संचालकों ने इस कार्रवाई का विरोध किया। लेकिन छावनी परिषद की टीम ने अपना काम जारी रखा। कहा कि छावनी क्षेत्र में अवैध डेरी के खिलाफ सर्वे किया गया था। पूरे क्षेत्र में 70 से ज्यादा अवैध डेरी चिह्नित की गई हैं। कुछ दिनों में पहले लालकुर्ती क्षेत्र में बुलडोजर कार्रवाई की गई थी। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। छावनी परिषद ने डेरी संचालकों को पहले भी खाली कराने के नोटिस दिए थे। जिन लोगों ने अभी तक डेरियां खाली नहीं की हैं, उनके खिलाफ दोबारा नोटिस तैयार किए जा रहे हैं। पुलिस प्रशासन की मदद से डेरियों को खाली कराया जाएगा। राजस्व अधीक्षक राजेश जॉन ने बताया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। छावनी की टीम की कार्रवाई के दौरान डेरी संचालकों की कर्मचारियों नोकझोंक भी हो गई। जब कर्मचारी गाय लेकर जाने लगे, तभी एक संचालक ने टीम का विरोध किया।
उनका कहना है कि डेरी से परिवार का पालन पोषण करते है। लेकिन कर्मचारी दुधारू पशुओं को ही लेकर चले गए। अब ऐसे में रोजगार पर संकट बन गया।