मेरठ। हाईकोर्ट बैच के लिए तमाम संस्थाए व राजनीतिक संगठन भले ही कितने ही दावे करते हों, लेकिन सीएम के यहां पहुंचने की खबर के बाद युवा अधिवक्ताओं ने जो एलान किया था, उसको ना पूरा कर दिखाया बल्कि कमिश्नरी पर मानव श्रृंखला बनाकर अपनी मौजूदगी भी मजबूती से दर्ज करा दी। उन्होंने हाईकोर्ट बेच के लिए जो ज्ञापन तैयार किया एक जिला प्रशासन की मार्फत सीएम तक पहुंचा भी दिया। इस पूरे प्रदर्शन का नेतृत्व पश्चिमी उत्तर प्रदेश युवा अधिवक्ता एसोसिएशन, मेरठ के प्रतिनिधि मंडल
वी.के. शर्मा, राम कुमार शर्मा, अशोक पंडित, विनोद कुमार काज़ीपुर, जगदीश प्रसाद, सलाउद्दीन एडवोकेट ने किया। सीएम को संबोधित ज्ञापन में कहा गया कि जनहित से जुड़े अत्यंत गंभीर मुद्दों को लेकर प्रस्तुत कर रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता एवं अधिवक्तागण लम्बे समय से कई प्रशासनिक और न्यायिक उपेक्षाओं का सामना कर रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की खंडपीठ की स्थापना की मांग। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता पिछले 50 वर्षों से हाईकोर्ट की खंडपीठ की मांग कर रही है। प्रयागराज व लखनऊ की दूरी, परिवहन साधनों की कमी, और समय व धन की बर्बादी के कारण आम नागरिकों का सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय प्राप्त करने का संवैधानिक अधिकार बाधित हो रहा है। सरकार द्वारा प्रचारित यह उद्देश्य कि हर व्यक्ति को न्याय सुलभ हो। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पूर्णतः विफल हो चुका है। महिलाएं, वृद्धजन, गरीब व ग्रामीण वर्ग के लिए हाईकोर्ट पहुँचना असंभव होता जा रहा है। यह आर्थिक, मानसिक व शारीरिक शोषण का कारण बन रहा है। स्थानीय खंडपीठ की स्थापना अब मात्र मांग नहीं, बल्कि न्यायिक न्याय का अनिवार्य हिस्सा बन गई है। इसके अलावा मेरठ शहर में अनियंत्रित रूप से अवैध निर्माण, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण, सड़कों पर कब्जा, तथा बिना स्वीकृति के वाणिज्यिक गतिविधियाँ चल रही हैं। यह सब मेरठ विकास प्राधिकरण एवं नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं। पूर्व में दिए गए शिकायतों, शासनादेशों और न्यायालयीय आदेशों की भी खुलेआम अवहेलना की जा रही है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी द्वारा भूमाफियाओं को संरक्षण:अवैध निर्माण एवं भूमि कब्जाधारियों के तार लखनऊ स्थित एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से जुड़े हैं, जिन्हें यह भू-माफिया अपना साझेदार बताकर प्रशासनिक दबाव बनाते हैं। अधिकारियों पर कार्यवाही करने से रोकना, जांचों को प्रभावित करना, और नियमविरुद्ध शमन कराने जैसे कृत्य शासन के लिए गंभीर चुनौती हैं। शहर में पुलिस प्रशासन की विफलता के चलते अवैध पार्किंग, सड़क किनारे कब्जा, अनियोजित निर्माण व ट्रैफिक पुलिस की निष्क्रियता के कारण मेरठ की यातायात व्यवस्था पूर्णतः ध्वस्त हो चुकी है। प्रतिदिन 3 से 4 लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवा रहे हैं, जिनमें स्कूली छात्र, महिलाएं, वृद्धजन प्रमुख हैं। यह सरकार की ज़िम्मेदारी है कि नागरिकों को सुरक्षित यातायात सुविधा उपलब्ध कराए। इसके अलावा राम कुमार शर्मा ने मांग की कि प्रदेश के युवा अधिवक्ता न्यायिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्हें न केवल मानसिक और भौतिक सुरक्षा की आवश्यकता है, बल्कि प्रारंभिक वर्षों में सरकार द्वारा आर्थिक सहायता योजनाएँ संचालित की जानी चाहिए, जिससे वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन निडर होकर कर सकें। साथ ही, अधिवक्ताओं की सुरक्षा हेतु शासन को विशेष अधिवक्ता सुरक्षा नीति भी बनानी चाहिए।
हमारी प्रमुख माँगें:
- 1. पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मेरठ) में उच्च न्यायालय की खंडपीठ की तत्काल स्थापना की जाए।
- 2. मेरठ विकास प्राधिकरण व नगर निगम में हो रहे भ्रष्टाचार एवं अवैध निर्माणों की CBI या SIT द्वारा जांच कराई जाए।
- 3. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की गोपनीय जांच कर उन्हें पद से पृथक किया जाए।
- 4. यातायात व्यवस्था को सुधारने हेतु जनसुनवाई आधारित एक्शन प्लान लागू किया जाए।
- 5. युवा अधिवक्ताओं के लिए राज्य स्तर पर वित्तीय सहायता योजनाएं और सुरक्षा नीति लागू की जाए।
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अन्यथा चेतावनी:
उपरोक्त बिंदुओं पर त्वरित एवं निर्णायक कार्यवाही नहीं की गई तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश युवा अधिवक्ता एसोसिएशन एक प्रदेशव्यापी अधिवक्ता आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी। सभी बिंदुओं पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नागरिकों एवं अधिवक्ताओं का शासन पर विश्वास बना रहे।