दीवान को नोटिस देकर भूले कैंट अफसर

kabir Sharma
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ओल्ड ग्रांट का है आवासीय बंगला, दीवान चैरेटेबल ट्रस्ट करता है स्कूल का संचालन, किसी अफसर का नहीं ध्यान

मेरठ। वेस्ट एंड रोड स्थित ओल्ड ग्रांट के बंगला नंबर 220 में कैंट एक्ट के तमाम कायदे कानूनों को ताक पर रखकर संचालित किया जा रहे दीवान स्कूल से कैंट के सभी अफसर चाहे वो सीईओ या डीईओ अथवा आर्मी अफसर सभी पूरी तरह से बे-खबर नजर आते हैं। किसी का भी अवैध रूप से संचालित इस स्कूल की तरफ नहीं है। जबकि मिनिस्ट्री की ओर से बार-बार कैंट इलाके में अवैध रूप से संचालित हो रही गतिविधियों को लेकर एडवाइजरी जारी की जा रही है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि कैंट का कोई भी दीवान स्कूल का कैंट एक्ट के खिलाफ संचालन होना नहीं मान रहा है। जबकि यदि जानकारों की मानें तो दीवान स्कूल पूरी तरह से कैंट एक्ट के खिलाफ संचालित किया जा रहा है। लेकिन कैंट अफसरों का ऐसा ना माना जाना ( यह इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि ना तो सीईओ कैंट और ना ही डीईओ व सब एरिया मुख्यालय) मालूम होता है। यदि वाकई ऐसा नहीं है तो अब तक कैंट अफसर इस स्कूल पर कार्रवाई अमल में लाते, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई की गयी हो, इसकी जानकारी इस संवाददाता को नहीं मिली है

220 वेस्ट एंड रोड ओल्ड ग्रांट का बंगला

कैंट के वेस्ट एंड रोड स्थित 220 नंबर का बंगला ओल्ड ग्रांट का बंगला है और यह बंगला किसी गीजा या गिरजा देवी के नाम जीएलआर में दर्ज बताया गया है। साल 1990 में इस बंगले में दीवान स्कूल का संचालन विद्या सागर दीवान ने शुरू किया था, जो पूरी तरह से कैंट एक्ट के नियमों व प्रावधानों के विपरीत है। इस बंगले में साल 1990 से शुरू किए गए दीवान स्कूल मामले की सुध लेने में कैंट अफसराें मसलन कैंट बोर्ड के अफसरों को करीब साल 1994 में आयी। जानकारों की मानें तो साल 1994 में से साल 1997 के दौरान कई नोटिस स्कूल संचालकों को दिए गए।

नोटिसों से आगे नहीं बढ़े अफसर

ओल्ड ग्रांट के इस बंगले में कैंट एक्ट को तार-तार किए जाने की बात करें तो कैंट अफसर केवल नोटिसों तक सीमित रहे उससे आगे नहीं बढ़ सके। साल 2024-25 में डीईओ कार्यालय ने बाकायदा मीडिया में विज्ञापन जारी कर वेस्ट एंड रोड के तमाम बंगलों में चल रहे स्कूलों पर कार्रवाई की बात तो की थी, लेकिन कार्रवाई से आगे वो नहीं बढ़ सके। मीडिया में विज्ञापन के तौर जो नोटिस जारी किया था तथा उस नोटिस में जिन-जिन स्कूलों के नाम लिस्ट में शुमार किए गए थे, वो डीईओ के दरबार में हाजरी लगाने जा पहुंचे। हाजरी लगी और फिर काम खत्म। उसके बाद कार्रवाई के नाम पर डीईओ ऑफिस से जिस प्रकार की आशंका जतायी जा रही थीं, वैसा कुछ नहीं हुआ। माना जा रहा है कि हाजरी इतनी दमखम वाली थी कि कार्रवाई की बात ही डीईओ कार्यालय भूल गया।

दीवान स्कूल में खामियों की लंबी फेरिस्त

वेस्ट एंड रोड स्थित जिस दीवान स्कूल की बात यहां की जा रही है, उसमें कैंट एक्ट के नजरिये से यदि बात करें तो खामियां बे-शुमार हैं। खामियां भी इतनी ज्यादा की अब तक तो इस स्कूल पर कैंट अफसरों को बुलडोजर चलाकर जमीदोज कर देना था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसके पीछे कैंट अफसराें के दरबार में दीवान के संचालकों की हाजरी का जलवा बताया जाता है। अब यदि खामियाें की बात करें तो ओल्ड ग्रांट के इस बंगले में कार्रवाई को जो आधार चाहिए वो सभी मौजूद हैं। मसलन बंगले में चेंज ऑफ परपज, सब डिविजन ऑफ सइट और अवैध निर्माण ये तमाम चीजें कैंट एक्ट के खिलाफ हैं और कैंट अफसरों के पास कार्रवाई का पर्याप्त आधार ये तमाम चीजें हैं। लेकिन यह बात अलग है कि सीईओ हों या फिर डीईओ अथवा फौजी अफसर यानि सब एरिया में बैठने वाली आर्मी के अधिकारी लगता है कि इनमें से कोई भी इस बंगले में एक्ट के खिलाफ किए गए कृत के खिलाफ कार्रवाई की हिमाकत की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

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अवैध स्कूल के अलावा भी काफी कुछ

दीवान स्कूल का संचालन व निर्माण ही अवैध नहीं है, बल्कि स्कूल के संचालन के जो मानक है उनकी भी अनदेखी की गयी है। यहां यह भी बता दें कि अवैध दीवान स्कूल के संचालन के लिए केवल कैंट अफसर ही दोषी नहीं है बल्कि इसको मान्यता देने वाले सीबीएसई के अफसरों ने भी लगता है आंखों पर पट्टी बांध ली है। नियमानुसार किसी भी स्कूल को मान्यता या संचालन की अनुमति देने के लिए सीबीएसई के अफसरों को जिन मानकों का पालन कराना चाहिए लगता है उनकी भी भरपूर अनदेखी की गयी।

इनका परीक्षण है जरूरी

जानकार बताते हैं कि सीबीएसई अफसरों को किसी भी स्कूल को संचालन की मान्यता देने से पहले उस स्कूल की बिल्डिंग का प्लान मसलन कैंट बोर्ड से उसके भवन का स्वीकृत किया गया मानचित्र। अब क्योंकि दीवान स्कूल ओल्ड ग्रांट के बंगले में संचालित किया जा रहा है और उसमें चेंज ऑफ परपज, सब डिविजन ऑफ साइट व अवैध निर्माण है, इसलिए कैंट बोर्ड से मानचित्र या कहें बिल्डिंग प्लान स्वीकृत होने का सवाल ही नहीं पैदा होता। पानी की शुद्धता का प्रमाण पत्र जो एमएच के हैल्थ ऑफिसर की कलम से जारी किय जाता है, वह भी होगा इसकी भी कोई गारंटी नहीं, क्योंकि इसके लिए जरूरी है कि जिस भवन में स्कूल संचालित किया जा रहा है, उसका बिल्डिंग प्लान कैंट बोर्ड से जारी किया गया हो और जब स्कूल ही अवैध निर्माण कर चलाया जा रहा हो तो फिर कैंट बोर्ड से बिल्डिंग प्लान स्वीकृति का सवाल ही बेमाने है। साफ सफाई की व्यवस्था को लेकर जारी किया गया प्रमाण पत्र यह भी होगा इसके कोई आसार नहीं। इसलिए जरूरी है कि जब इतनी खामियाें के साथ यह स्कूल संचालित किया जा रहा है तो फिर सीईओ कैंट, डीईओ अथवा सब एरिया मुख्यालय में बैठने वाले अफसरों का संज्ञान लिया जाना जरूरी है।

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