कोर्ट में पेश करने होंगे मालिकाना हक के पेपर

kabir Sharma
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नगर निगम और आवास विकास परिषद को हाईकोर्ट से नोटिस, नई सड़क खसरा नंबर 6041 का असली मालिक कौन, हजारों हजार करोड़ खर्च करने की जल्दबाजी क्यों

मेरठनगर निगम और आवास विकास परिषद के अफसर शास्त्रीनगर नई सड़क स्थित खसरा 6041 के मालिकाना हक के पेपर पेश करने होंगे । हाईकोर्ट में इस मामले में अगली सुनवाई अब 25 मार्च को होगी। हाईकोर्ट में दायर की गयी रिट में नई सड़क स्थित खसरा 6041 के अलावा जैना ज्वैलर्स तथा पीवीएस मॉल के संचालक के होटल का भी मामला शामिल है। वहीं दूसरी ओर खसरा 6041का मामला नगर निगम प्रशासन के गले की हड्डी बन गया है। हालांकि नगर निगम के द्वारा वहां निर्माण का कार्य लगातार जारी है।

यह है पूरा मामला

गढ़ रोड शास्त्रीनगर स्थित खसरा संख्या 6041 का अधिग्रहण कर नगर निगम ने वहां पर अपने कार्यालय का निर्माण शुरू करा दिया है। इस मामले को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट राहुल ठाकुर ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर दी गयी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने रिट याचिका को स्वीकार कर लिया। स्वीकार कर लिए जाने के बाद इसमें नगर निगम मेरठ और आवास विकास परिषद के अलावा प्रमुख सचिव नगर विकास उत्तर प्रदेश शासन को मालिकाना हक को लेकर पेपर भेजे गए। बताया गया है कि शुरू में हाईकोर्ट को बताया गया कि यह मामला पहले से सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है, जबकि यह आधा सत्य है। 6041 को लेकर जो मामला सुप्रीमकोर्ट में चल रहा था उसका पहले ही डिस्पोटजल हो चुका है। दरअसल खसरा 6041 का मामला एसडीएम मेरठ की कोर्ट में चल रहा है। सुप्रीमकोर्ट ने तो सिर्फ इस मामले में एसडीएम मेरठ की कोर्ट को मामले को निश्चित तिथि बताते हुए उस तिथि तक विवाद के निपटारे के निर्देश दिए थे। यह बात अलग है कि आज तक भी इस विवाद को निपटाया नहीं जा सका। दरअसल विवाद तभी निपट सकता है जब किसी भी पक्ष का नाम दाखिल खरिज किया जाए। इस जमीन पर मालिकाना हक अलीगढ़ के रूप किशोर परिवार का बताया जा रहा है। उन्हीं लोगों ने दाखिल खारिज के लिए अर्जी दी है। जहां तक नगर निगम का सवाल है तो उन्होंने केवल भूकि को अधिगृहित किया है। नगर निगम के पास मालिकाना हक का कोई पेपर ना होते हुए भी इस पर करोड़ों करोड़ की रकम खर्च की जा रही है। ऐसा क्यों किया जा रहा है जब यह सवाल पूछा जाता है तो अफसर बगले झांकने लगते हैं। कोर्ट में मामला चलने की बात कहकर सवाल से पल्ला झाड़ लेते हैं।

अफसरों का नया खेल

नगर निगम के पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह ने खुलासा किया कि इस मामले में गर्दन फंस जाने के बाद निगम के अधिकारी अब नए खेल पर उतर आए हैं। वो खसरा संख्या ६०४१ को अब ६०३१ साबित करने पर उतर आए हैं। कुछ पेपर जो कोर्ट में दायर किए गए हैं उनमें खसरा ६०४१ को उन्होंने ६०३१ लिख दिया है। लेकिन उनका यह खेल वक्त रहते पकड़ में आ गया। वहीं दूसरी ओर रिट दायर करने वाले राहुल ठाकुर ने बताया कि निगम अफसरों के इस खेल की जानकारी हाईकोर्ट को भी दी जाएगी।

25 मार्च को होगी सुनवाई

इस मामले में हाईकोर्ट में अगली सुूनवाई अब 25 मार्च को होनी है। रिट दायरकर्ता की ओर से मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं की टीम का प्रयास है कि 25 मार्च को 6041 के संबंध में कोई ठोस आदेश हाईकोर्ट से लिया जाए। माना जा रहा है कि उनका प्रयास होगा कि मालिकाना हक के पेपर ना कोर्ट के पटल पर रखे जाने के स्थिति में काम बंद कराए जाने के आदेश लिए जाएं। हालांकि पहले कुूछ भी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना तय है कि खसरा 6041 अब नगर निगम अधिकारियों के गले की फांस बन गया है। 6041 मार्च को हाईकोर्ट से इस मामले में बड़े आदेश की उम्मीद की जा रही है।

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