ऋषभ में कवियों की सजी महफिल

kabir Sharma
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देश विदेश के नामी कवियों ने किया कविता पाठ, ऋषभ एकाडेमी में पहुंचे थे पूरे शहर से लोग, देर रात उठाया कविता पाठ का लुफ्त

मेरठ। अमर बलिदानी भगत सिंह बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन छावनी के वेस्ट एंड रोड मंदिर मार्ग स्थित शहर के प्रतिष्ठित ऋषभ एकाडेमी में किया गया। देर रात तक लोगों इस शानदार कार्यक्रम में जमे हुए। कार्यक्रम में नगर के तमाम वरिष्ठ लोग मौजूद रहे। भारी संख्या में भाजपा नेता मौजूद रहे। ऋषभ सचिव डा. संजय जैन ने सभी ऋषभ प्रबंध समिति की ओर से स्वागत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री वरुण अग्रवाल अग्रवाल एवं दीप प्रज्वलन श्री अमित गर्ग ‘मूर्ति’ द्वारा किया गया। विशिष्ट अतिथि के रूप में फ़िल्म निर्माता श्री अमित जानी उपस्थित रहे। आयोजन का सफल संचालन सौरभ जैन ‘सुमन’ ने किया, जबकि प्रेरणा स्रोत के रूप में डॉ. अनामिका जैन अम्बर का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का संयोजन हिंदी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ जैन सुमन ने किया औऱ सह- संयोजक की भूमिका वरुण अग्रवाल एवं नीरज मित्तल ने निभाई, कवि सम्मेलन में महानगर के प्रतिनिधी डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, अरुण गोविल, डॉ. सोमेंद्र तोमर, डॉ. राजकुमार सांगरवान, विवेक रस्तोगी, राजेन्द्र अग्रवाल , कमलदत्त शर्मा , अरुण जिंदल सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की , कवियों ने अपनी रचनाओं से देशभक्ति, समाज और जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
इसी क्रम में कवि स्वयं श्रीवास्तव ने अपनी मार्मिक पंक्तियों से श्रोताओं को भावुक कर दिया—
“रोज़ मन नहीं करता गाने गुनगुनाने का,
जिंदगी की पुस्तक को बाँचना तो पड़ता है।
पाँवों में बाँध लिए पेट की खातिर घुँघरू,
मन नहीं होता है पर नाचना तो पड़ता है।”

खेल बड़ा मुश्किल था लेकिन आसानी से जीत गए
चालाकी से वो हारा हम नादानी से जीत गए

मुद्दत प्यासे रह कर हमने अपनी मांगें मनवाईं
चाहे जान गवां दी लेकिन हम पानी से जीत गए,

-वरुन आनंद

राज़ लगती है मगर राज़ नहीं होती है
ज़िंदगी सिर्फ मधुर साज़ नहीं होती है
बीत जाती है अचानक, तो पता चलता है
उम्र के पांव की आवाज़ नहीं होती है

-पद्मिनी शर्मा

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वंशवादियों की विष बेलें फूलती रही तो,
विष के वमन को विकास लिखा जाएगा
अवसरवादिता के शूल ना हटायें गए,
योग्य राघवों को वनवास लिखा जाएगा
चरखे के चरणों में चाँदनी लुटाने वालों,
क्यों नहीं तुम्हारा उपहास लिखा जाएगा
भगतसिंह की फांसी की रस्सियां बताओ कभी,
भारत का नया इतिहास लिखा जाएगा

डॉ. आदित्य जैन

अमर बलिदानियों के हर किसी संघर्ष की जय हो

अंधेरों से उजालों तक चले उत्कर्ष की जय हो

ज़मीं से आसमाँ तक सौंदर्य का प्रतीक ये प्यारा

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तिरंगा हर जगह फहरे यूँ भारतवर्ष की जय हो

-दिनेश रघुवंशी

दुनियां हिलाने वाला भी इक झटके में हिल जाता है
खाल खींचने वाला कट्टरपंथी भी छिल जाता है
ख़ामेनेई की मौत विश्व को ये ही सबक सिखाती है
बारूद खेलने वाला खुद बारूदों में मिल जाता है
-सौरभ जैन सुमन

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बिखरकर शौर्य की खुशबू चमन को चूम लेती है
जवाँ हसरत तिरंगे की गगन को चूम लेती है
सिपाही जब निकलता है वतन पर जान देने को
वतन की धूल उड़ उड़ कर बदन को चूम लेती है
-डॉ अनामिका जैन अम्बर

कार्यक्रम में ऐडको डेवलपर्स, के एल इंटरनेशनल, जैना जेवेलर्स, ऋषभ अकादमी, पायल फर्नीचर, अरहंत जेवेलर्स, आई आई एम टी यूनिवर्सिटी, सुभारती विश्वविद्यालय, आदि की सहभागिता रही। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने देर रात तक कवियों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया। आयोजन ने एक बार फिर मेरठ में साहित्यिक वातावरण को सजीव कर दिया।
अंत में आयोजकों की ओर से ऋषभ के सचिव डा. संजय जैन ने सभी अतिथियों एवं कवियों का आभार व्यक्त किया गया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम की कोर कमिटी में डॉ प्रतीक गुप्ता, उमंग गोयल, नीतीश राजपूत, मनमोहन भल्ला, अमन जैन, सुशील कुमार, दिव्यांश टन्डन, उदिता शर्मा आदि उपस्थित रहे

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