नगर निगम के हाउस टैक्स सिस्टम ने जनता बेहाल, दस फीसदी तक की बढ़त्तरी, हाउस टैक्स कम करने के नाम धंधा, पार्षदों की भी सुनवाई नहीं
मेरठ। GIS सर्वे के नाम पर हाउस टैक्स के नाम पर जो कुछ हो रहा है, उससे भाजपा को शहर की तीनों विधानसभा सीटों पर करीब दो लाख वोटों के नुकसान की आशंका जतायी जा रही है। यह आशंका कोई और नहीं बल्कि भाजपा के वो नेता जता रहे हैं संगठन जिन्हें चुनाव प्रबंधन का पिलर मानता है। वहीं दूसरी ओर नगरायुक्त और महापौर ने GISसर्वे के बाद हाउस टैक्स के जो बिल भेजे जा रहे हैं उन्हें सही करार दिया है। हालांकि उन्होंने राजनीतिक प्रश्न का उत्तर देने से कन्नी काट ली है। उनका तर्क है कि मेरठ। GIS सर्वे के नाम पर हाउस टैक्स के नाम पर जो कुछ हो रहा है, उससे भाजपा को शहर की तीनों विधानसभा सीटों पर करीब दो लाख वोटों के नुकसान की आशंका जतायी जा रही है। यह आशंका कोई और नहीं बल्कि भाजपा के वो नेता जता रहे हैं संगठन जिन्हें चुनाव प्रबंधन का पिलर मानता है। वहीं दूसरी ओर नगरायुक्त और महापौर ने GISसर्वे के बाद हाउस टैक्स के जो बिल भेजे जा रहे हैं उन्हें सही करार दिया है। हालांकि उन्होंने राजनीतिक प्रश्न का उत्तर देने से कन्नी काट ली है। उनका तर्क है कि GIS से सही मूल्यांकन हुआ है। जिन्होंने प्रॉपर्टी में बदलाव किया, उनका टैक्स बढ़ा। साथ ही 20% छूट की अवधि 31 जनवरी तक बढ़ाई गई (अब खत्म हो चुकी है, लेकिन वसूली जारी)।
महानगर की पब्लिक को रख दिया हिला कर
GIS सर्वे के आधार पर गृहकर (हाउस टैक्स) में अचानक भारी बढ़ोतरी ने शहर की जनता को हिलाकर रख दिया है! कई इलाकों में पिछले साल के मुकाबले टैक्स 3 से 10 गुना तक बढ़ गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि जिन घरों में पहले 98 रुपये का बिल आता था, अब 3730 रुपये तक पहुंच गया। 250 रुपये का बिल बढ़कर 1600 रुपये हो गया। जहां 300 का हाउस टैक्स आता था उसको कई मामलों में तीस हजार तक में कन्वर्ट कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि ये सारे मामले महापौर को बता दिए गए हैं।
कैंप कार्यालय पर दर्ज करा रहे आपत्तियां
GIS सर्वे के नाम पर हाउस टैक्स बिलों में किए गए इस बड़े बदलाव से नाराज लोग नगर निगम कार्यालय और महापौर हरिकांत अहलूवालिया के कैंप ऑफिस पर भारी भीड़ जुट रही है। लोग नारेबाजी कर रहे हैं, आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। भाजपा के महानगर उपाध्यक्ष नरेंद्र उपाध्याय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने महापौर कार्यालय पर हंगामा किया। कई जगहों पर प्रदर्शन हुए, अधिकारियों को बुलाकर समाधान निकाला गया।
महापौर व नगरायुक्त का ऑल इज वैल का दावा
विरोध के इतर महापौर व नगरायुकत ऑल इज वैल का दाव पहले ही कर चुके हैं। इसको लेकर हुए बवाल के बाद पिछले दिनों महापौर और नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया – टैक्स की दरें नहीं बढ़ाई गईं, बल्कि GIS सर्वे से सही मूल्यांकन हुआ है। जिन्होंने प्रॉपर्टी में बदलाव किया, उनका टैक्स बढ़ा। साथ ही 20% छूट की अवधि 31 जनवरी तक बढ़ाई गई (अब खत्म हो चुकी है, लेकिन वसूली जारी)। निगम ने ऐप लॉन्च किया जहां घर बैठे बिल देख सकते हैं, आपत्ति दर्ज करा सकते हैं और ऑनलाइन पेमेंट कर सकते हैं।
विपक्ष बोला तोड़ दी कमर
महानगर कांग्रेस के अध्यक्ष रंजन शर्मा का कहना है कि यह बीजेपी सरकार की नाकामी है। उन्होंने कहा कि “पहले से आयकर, GST, अब ये टैक्स… कमर टूट गई!” सपा के अफजाल सैफी का भी ऐसा ही मानना है।
भाजपा को साइड इफैक्ट
मेरठ शहर, कैंट और दक्षिण विधानसभा सीटें भाजपा के गढ़ मानी जाती हैं, लेकिन इस बढ़ोतरी से मध्यम वर्ग और प्रॉपर्टी ओनर्स में भारी नाराजगी है। माना जा रहा है कि इससे इन तीनों सीटों पर कुल लगभग 2 लाख वोटों का नुकसान हो सकता है। मध्यम वर्ग के वोटर (जो पहले BJP के साथ थे) अब विपक्ष की तरफ मुड़ सकते हैं। या फिर वोट ही डालने ना जाएं। पहले से ही प्रदर्शनों में BJP कार्यकर्ता शामिल हैं, जो पार्टी के लिए आंतरिक असंतोष दिखाता है। हालांकि नगर निगम अब स्वकर फॉर्म घर-घर बांट रहा है ताकि लोग खुद मूल्यांकन कराएं और गलत बिल सुधार सकें। लेकिन जनता का गुस्सा शांत होने में समय लगेगा।
ये कहना है महापौर व भाजपा नेताओं का
महापौर हरिकांत अहलूवालिया का कहना है कि एक कोई बिल ऐसा दिखाया जाए जिसमें अनाप शनाप हाउस टैक्स लगा दिया गया है। विरोध तो सब कर रहे हैं, लेकिन गलत हाउस टैक्स लगाए जाने की बात कोई साबित नहीं कर रहा है।
भाजपा नेता नरेन्द्र उपाध्यक्ष ने महापौर से पूछा है कि उन्होंने पब्लिक के सामने नगर निगम बोर्ड का स्पेशल सेशन बुलाने की बात कही है, महापौर तनिक बताएं कि निगम का स्पेशन सेशन कब बुलाया जाएगा, यह मामला पार्टी हित से जुड़ा है।