टीपीनगर और जानी थाना क्षेत्र के एनएच-58 हाइवे पर आबाद हो गया नया कबाड़ी बाजार, कई घरों में सजती है जिस्म की मंड़ी
मेरठ। एक अरसा पहले कोर्ट के आदेश पर जिस्म की मंड़ी के तौर पर देश भर में खास पहचान रखने वाला कबाड़ी बाजार भले ही पुलिस प्रशासन ने बंद करा दिया हो, लेकिन बागपत फ्लाई ओवर के आसपास टीपीनगर और जानी थाना इलाके में शहर के कबाड़ी बाजार से कहीं बड़ी जिस्म की मंड़ी बसा दी गयी है। यह ठीक वैसी है जैसे कलकत्ता का सोनागाछी बाजार है। फर्क सिर्फ इतना है कि सोनागाछी में बहुमंजिला इमारत हैं और यहां सुभारती एमआईटी के आसपास ओयो होटल और घरों में जिस्म की मंड़ी चौबीस घंटे सजती है। बागपत रोड पर तमाम कच्ची कालोनियों में कई लोगों ने मकान बनाकर ओयो होटल के संचालकों काे मोटी रकम पर अपने मकान किराए पर दे दिए हैं। सुभारती के आसपास तो बहुत ही बुरी स्थित है। यहां तो सड़क के दोनों ओर ओयो होटल की पैठ सरीखी हालत है। इस एरिया में 52 ओयो होटल हैं। कुछ लोगों ने तो घरों में ओयो होटल खोल लिए हैं। जनवाणी जिस इलाके की बात कर रहा है, वहां ना तो टूरिस्ट आते हैं और ना ही बाहर से आने वाले इस इलाके में ठहरते हैं। ना ही यहां कोई कारोबारी इलाका है जो बाहर से आने वाले यहां ठहरेंगे। यहां केवल और केवल जिस्म बेचने वालों का ठिकाना है, इसके अलावा कुछ भी नहीं।
पांच हजार रुपए महीना में लाइसेंस
इस इलाके में ओयो के नाम पर चकला चलाने का लाइसेंस लेने के लिए थाना पुलिस को सिर्फ पांच हजार रुपए महीना देने होते हैं, उसके बाद खुलकर किसी प्रकार का ना तो पुलिस छापे का डर है ना ही चेकिंग का झंझट। यदि कभी कभार चेकिंग की नौबत भी आती है तो उसकी खबर पहले ही जिस थाने को महीने के पांच हजार रूपए जाते हैं, वहां का स्टाफ पहले ही आगाह कर देता है कि लड़कियां व ग्राहकों को निकाल दो। कुछ देर के लिए ओयो के नाम पर चकलाघर चलाने वाले अपने ग्राहकों और लड़कियों को वहां से निकला देता है। करीब दो साल पहले इस पूरे इलाके के लोगों ने ओयो होटलों के खिलाफ अभियान चलाया था। खुब हो-हल्ला मचा था, पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन बजाए ओयो पर कार्रवाई के पुलिस ने विराेध करने वालों पर ही कार्रवाई कर दी। कुछ ने बताया कि उन्हें मुचलका पावंद कर दिया गया।
अफसरों को फुर्सत नहीं या फेर ली नजर
ओयो होटलों को लेकर जानी और टीपीनगर पुलिस की कारगुजारियों की खबर अफसरों को ना हो यह बात गले नहीं उतरती। थाना पुलिस ना बताए तो फिर एलआईयू की रिपोर्ट नियमित रूप से जाती है, यदि एलआईयू भी बेखर है तो फिर पुलिस की इस महत्वपूर्ण यूनिट की कम से मेरठ तो कतई जरूरत नहीं है। आला अफसर यदि बेखबर है तो फिर उनकी काबलियत पर सवाल है। ऐसा कैसे हो सकता है कि थानेदार पांच-पांच हजार में चकलाघर चलाने का लाइसेंस दे रहे हो और उन्हें खबर ना हो।
कोड़ियों के भाव बिक रही रही नियम व शर्ते
ओयो होटल के लिए हैं कुछ कायदे कानून ओयो होटल खोलने के लिए जरूरी है कि सराय पंजीकरण एक्ट में पंजीकरण हो। होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को राजस्व, पुलिस, खाद्य सुरक्षा, अग्निशमन और पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना आवश्यक होता है। इन विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही जिला प्रशासन द्वारा इनका रजिस्ट्रेशन किया जाता है।
ऐसे लेना होता है लाइसेंस
ओयो होटल और गेस्ट हाउस को लाइसेंस प्राप्त करने के लिए शर्तें निर्धारित हैं। इसके तहत संचालकों की जवाबदेही तय करने की भी शर्त शामिल है। इसके अलावा सीसीटीवी और सुरक्षा मानक, होटल और गेस्ट हाउस में सीसीटीवी कैमरे लगाना और सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। होटल और गेस्ट हाउस में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक होगा। होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को मेहमानों के आने-जाने और पहचान से जुड़े नियमों का पालन करना होगा, जिसमें पहचान पत्र लेना और रिकॉर्ड रखना शामिल है। होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच करनी और इसकी सूचना पुलिस को देनी होगी। इसके अलावा, ओयो होटल खोलने के लिए जरूरी है कि यदि होटल आवासीय क्षेत्र में स्थित है, तो व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति लेनी आवश्यक है। ओयो होटल और गेस्ट हाउस संचालक को पर्यावरण और स्वास्थ्य विभाग से अनुमति लेनी आवश्यक है।