स्कूल से शिक्षक क्लास से बच्चे गायब

kabir Sharma
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गुरू जी को बना दिए बीएलओ कौन ले क्लास, मासूमों की शिक्षा की कीमत पर एसआईआर, टीचरों का भारी टोटा

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, नगरीय क्षेत्र में बेसिक के 130 स्कूलों के सापेक्ष महज 150 ही शिक्षक, इनमें भी 80 फीसदी को बना दिया बीएलओ, शिक्षा मित्रों के सहारे चल रही है पढ़ाई

मेरठ। स्कूलों से शिक्षक गायब हैं मतदता सूची से नाम गायब हैं क्योंकि गुरूजी को बीएलओ बना दिया गया है और गुरूजी नाम जोड़ने और काटने के काम में लगे हैं। नौबत यही तक होती तो भी गनीमत थी, तुर्रा ये कि मेरठ जनपद में शिक्षकों की भारी कमी है। नगरीय क्षेत्र में 130 बेसिक के स्कूल हैं इनके लिए महज 150 ही सरकारी यानि स्थायी शिक्षक हैं। औसतन एक स्कूल पर एक शिक्षक। स्कूल चलों अभियान की यह स्याह सच्चाई है जो शायद उन अफसरों को अच्छी ना लगे जिन्होंने नगरीय क्षेत्र के 80 फीसदी से ज्यादा बेसिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को एसआईआर के नाम पर बीएलओ बनाकर मतदाताओं के नाम काटने और जोड़ने में लगा दिया है। स्कूल से शिक्षक गायब हैं और मतदाता सूची ने नाम ये दोनों ही काम बीएलओ बने शिक्षकों के मत्थे मढ़ दिए गए हैं।

शिक्षा अधिकारियों की चुप्पी पर नाराजगी

चुनाव आयोग के निर्देश पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के काम में बेसिक स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का काम बीएसए का है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ की नाराजगी इस बात से है कि जिला प्रशासन के जिस फरमान पर बेसिक के शिक्षकों को एसआईआर के लिए बीएलओ बना दिया है, उस फरमान को जारी करने वाले प्रशासन के अफसर को पुरजोर तरीके से यह क्यों नहीं बताया जाता कि नगरीय क्षेत्र में शिक्षकों का भारी अभाव है और जब 80 फीसदी से ज्यादा शिक्षकों को बीएलओ बना दिया जाएगा तो फिर क्लास में पढ़ाएगा कौन और जब शिक्षक ही क्लास में नहीं आएंगे तो फिर बच्चे क्यों स्कूल आएंगे क्योंकर अभिभावकों बच्चों को स्कूल भेजेंगे। मसलन सूबे की योगी सरकार के स्कूल चलो अभियान में लग गया पलीता।

शिक्षक विहीन हैं कई स्कूल

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष विनोद त्यागी बताते हैं कि जनपद के नगरीय क्षेत्र में बेसिक व माध्यमिक के कुल 130 स्कूलों में कुछ ऐसे भी हैं जिनमें एक भी शिक्षक नहीं हैं। इससे बुरी बात और क्या हो सकती है। और रही सही कसर जो शिक्षक हैं भी उनको बीएलओ बनाकर पूरी कर दी गई है। बेहतर तो यह होता कि बीएसए जिन्होंने शिक्षकों को एसआईआर की डयूटी में भेजे जाने का फरमान जारी किया है वो डीएम मेरठ को बताती कि शिक्षकों की भारी कमी हैं कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। मासूम बच्चों की शिक्षा की बात सोचे बगैर ही एसआईआर के कार्य के लिए बीएलओ बनाकर भेज दिया गया।

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कौन पढ़ा रहा है कैसी पढ़ाई है हो रही

शिक्षक विहीन स्कूलों की यदि बात की जाए तो थापर नगर स्थित प्राथमिक कन्या विद्यालय में पांच साल एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है। इसमें बजाए शिक्षक की नियुक्ति करने के प्राथमिक कन्या विद्यालय थापर नगर को फाजलपुर प्राथमिक विद्यालय में अटैच या मर्ज कर दिया। चलो स्कूल अभियान चलाने वाले अफसर यह बता दें कि थापर नगर में रहने वाली बेटियां इतनी दूर फाजलपुर भला कैसे जा सकती हैं। शिक्षक की कमी के चलते थापर नगर से प्राथमिक कन्या विद्यालय ही नहीं छिना बल्कि थापर नगर की बेटियों की पढ़ाई भी छीन ली गई है। प्राथमिक विद्यालय फाजलपुर की यदि बात की जाए तो वहां भी शिक्षकों का अभाव है। नगरीय क्षेत्र में कई स्कूल ऐसे भी हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं है और ऐसे में पढ़ाई शिक्षा मित्रों के कंधों पर है। जहां शिक्षक ही नहीं होंगे उस स्कूल से पढ़कर निकलने वाली नौनिहाल कितनी काबलियत रखते होंगे इसकी भी चिंता बीएलओ का फरमान जारी करने वालों को शायद नहीं है। प्राथमिक विद्यालय रिठानी नंबर एक इसके प्रभारी प्रधानाध्याप को ही बीएलओ बनाकर एसआईआर की डयूटी में लगा दिया है इसके बाद यहां पढ़ाई का जिम्मा गोलाबढ़ के सरकारी स्कूल मजज दो शिक्षा मित्रों के सहारे चल रहा है। कंपोजिट विद्यालय परतापुर बराल यह कक्षा एक से आठ तक का है इसमें महज एक शिक्षक और एक शिक्षा मित्र। इससे अंदाजा लगा लीजिए नौनिहालों के साथ शिक्षा के नाम पर कितना भद्दा मजाक किया जा रहा है। पीएसी छटी वाहिनीके प्रभारी प्रधान अध्यापक की ड्यूटी बीएलओ बनाकर लगा दी गयी है वहां केवल एक शिक्षक है। शिक्षा के नाम पर सिस्टम के भद्दे मजाक की यह पराकाष्ठा है।

डीएम और बीएसए को कराया अवगत

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष विनोद त्यागी ने बताया कि शिक्षकों की कमी की बात को अनेक बार डीएम व बीएसए को बताया जा चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की जा सकी।

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