28 फरवरी को होना था नगर निगम उपाध्यक्ष का चुनाव, भाजपा की निगम की राजनीति गड़बड़ाई, निगम कार्यकारिणी चुनाव स्थगित, 7 मार्च को होगा
मेरठ। नगर निगम कार्यकारिणी का चुनाव स्थगित कर दिया गया है। यह चुनाव शनिवार २८ फरवरी को होना था, लेकिन निगम कार्यकारिणी के सदस्यों को सहायक नगरायुक्त की मार्फत भेजी गयी सूचना में बताया गया है कि महापौर हरिकांत अहलूवालिया के निर्देशानुसार 28 फरवरी को होने वाला कार्यकारिणी उपाध्यक्ष का चुनाव स्थगित हो गया है। यह चुनाव अब 7मार्च को निर्धारित किया गया है।
भाजपा की निगम की राजनीति पूरे उफान पर
निगम कार्यकारिणी में भाजपा के आठ सदस्य हैं। इनमें से छह सदस्य खुद को कार्यकारिणी उपाध्यक्ष चुनाव में पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी होने का दम भर रहे हैं। कार्यकारिणी में भाजपा के जितने भी सदस्य हैं वो खुद को पार्टी का गंभीर और दूसरे सदस्य को चलताऊ दावेदार बता रहे हैं। ऐसा नहीं कि खुद को दावेदार बताने वाले केवल पार्टी के भरोसे ही हैं। ये तमाम ऐसे दावेदार हैं जो खुद भी अपने स्तर से उपाध्यक्ष का चुनाव जीतने के लिए तमाम वो हथकंड़े अपनाने से भी बाज नहीं आ रहे हैं, जो आमतौर पर इस प्रकार के चुनाव में अपनाए जाते रहे हैं। हालांकि जहां तक संगठन के नेताओं की बात है तो उनका दावा है कि उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए जितने वोट चाहिए उससे ज्यादा ही उनके पास हैं। लेकिन जब उनसे सवाल किया गया कि जब पर्याप्त वोट हैं तो फिर चंद घंटे पहले चुनाव को स्थगित कर दिए जाने का क्या कारण है तो उनके पास कोई माकूल जवाब नहीं था, केवल इतना कहकर आगे निकल गए कि होली का पर्व पड़ रहा है जिसकी वजह से महापौर ने चुनाव को स्थगित कर दिया है। उनके पास इस बात का भी कोई उत्तर नहीं था कि होली तो तीन और चार मार्च की पड़ रही है।
चुनाव लड़ाओ वर्ना पार्टी लाइन से अलग
इस बीच जानकारी मिली है कि उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर छह दावेदारों में शामिल कुछ निगम कार्यकारिणी के एक सदस्य ने अलटीमेटम दे दिया है कि या तो उन्हें चुनाव लड़ाया जाए वर्ना उन्हें पार्टी लाइन के परे जानकर निर्णय लेने में भी कोई गुरेज नहीं होगी। जानकारों की मानें तो इस तरह की धमकी के बाद नगर निगम उपाध्यक्ष के चुनाव में रणनीतिकारों को पाार्टी का अंकगणित गड़बड़ाता नजर आया। इस बात की भी आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता कि यदि कार्यकारिणी की एक भी वोट पार्टी लाइन से इतर जाती है तो इस बात की पूरी गुंजाइश है कि वो वोट अपने साथ एक वोट और ले जाए। माना जा रहा है कि इसी आशंका के चलते भाजपा के चुनावी रणनीतिकार किसी प्रकार का जोखिम मोल नहीं लेना चाहते थे। क्योंकि जो आसार नजर आ रहे थे, उसके चलते उपाध्यक्ष के चुनाव में पार्टी को ऐसा नुकसान उठाना पड़ सकता है जिसकी बाद में भी भरपाई संभव नहीं थी। फिर भाजपा के रणनीतिकार वो सब नहीं दोहराना चाहते हैं जो निगम कार्यकारिणी के चुनाव में हो चुका है। तमाम कोशिशों के बाद भी पार्षद अजय चंद्रा को कार्यकारिणी में नहीं पहुंचाया जा सका और पार्षद संजय सैनी को बागी करार दिए जाने के बाद भी उन्हें सारी ताकत लगाकर भी भाजपा के नेता कार्यकारिणी में जाने से नहीं रोक सके।
हो यह रहा है
नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष के चुनाव की यदि बात की जाए तो भाजपा के आठ में छह पार्षद ऐसे हैं जो खुद को उपाध्यक्ष माने बैठे हैं। नाम न छापे जाने के शर्त पर एक सदस्य ने बताया कि उनका उपाध्यक्ष बनना तय है। उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए जितने वोट चाहिए उतने पार्टी के पास मौजूद हैं। इतना ही नहीं उनका यहां तक कहना है कि इस बार विपक्ष की कोई चाल कामयाब नहीं होने दी जाएगी। ऐसा दावा करने वालों की संख्या छह है। सूत्रों ने जानकारी दी है कि इन छह के द्वारा खुद को उपाध्यक्ष मान लिए जाने के चलते भाजपा संगठन के नेता भी सांसत में हैं, लेकिन मुश्किल यह है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि किसको हां करें और किसको ना करें। किसी को भी ना करने का अर्थ है उसका बागी होकर विपक्ष के खेमे से हाथ मिला लेना है। यदि वाकई ऐसा हो गया तो जो कुछ कार्यकारिणी के सदस्यों के चुनाव में हुआ, फिर उसको दोहराने से भाजपा संगठन के तमाम नेता भी मिलकर नहीं रोक पाएंगे। इसलिए संगठन के नेताओं के पास जो भी दावेदार पहुंच रहा है संगठन किसी को भी ना नहीं कर रहा है। सब यह माने बैठे हैं कि संगठन उनके साथ है और बाकि के जो दावेदार हैं उनके दावे हवा में हैं। निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष का चुनाव गले की फांस बन गया है इसको संगठन भी मान रहा है।