मदरसों को विदेशी फंडिंग का मामला, जांच में फंस सकते हैं कई बड़े चेहरे, बड़ा सवाल यदि फंसे तो फिर क्या होगा, मेरठ के कई मदरसे हैं जांच के दायरे में
नई दिल्ली/लखनऊ/मेरठ। विदेशी फंडिंग से मदरसों के संचालन की जांच के आदेश के बाद जांच में फंस जाने के खौफ ने कई की नींद उड़ा दी है। यदि वाकई जांच में फंसे तो फिर सलाखों के पीछे लंबा वक्त गुजारने की नौबत आ सकती है। इतना ही नहीं यदि सलाखों के पीछे गए तो फिर बाबा का बुल्डोजर भी घर और प्रतिष्ठान पर चल सकता है। इतना ही नहीं इस जांच की आंच की पलटे कई करीबियों को भी झुलसा सकती है।
सरकारी आदेश ने उड़ाई है नींद
एक सरकारी आदेश के बाद प्रदेश के कई मदरसों में ‘संभावित’ विदेशी फंडिंग का मामला गरमा गया है। आशंका है कि उत्तर प्रदेश के लगभग 4000 मदरसों में विदेशी फंडिंग हो रही है जिसकी जांच में एसआईटी लगी हुई है। जांच के आदेश जारी होने के बाद मेरठ के भी उन कई मदरसा संचालकों में छटपटाहट स्वाभाविक है जिन्होंने ‘तथाकथित फंडिंग’ के आधार पर मदरसों की आलिशान इमारतें बना रखी हैं। बता दें कि मेरठ में भी कई मदरसे ऐसे हैं जिनकी इमारतें शानदार हैं और कुछ की इमारतों का खाका तैयार है।
ऐसे होगी जांच
बता दें कि जिन मदरसों की जांच होनी है उनके भवन निर्माण की लागत से लेकर उनके स्रोत को जाना जाएगा और साथ ही साथ इन मदरसों के सत्यापन के दौरान उनके बैंक खातों की भी पड़ताल होगी। जांच रिपोर्ट जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों द्वारा निदेशालय को भेजी जाएगी। बता दें कि अधिकतर मदरसा संचालकों की दलील होती है कि क़ौम द्वारा इमदाद के पैसे से यह मदरसे चलाए जाते हैं लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन मदरसों में छात्रों को ढंग का खाना भी मुहैया नहीं हो पाता तो उन मदरसों की बिल्डिंग आलीशान किस आधार पर होती है। अब जांच का सरकारी आदेश जारी होने के बाद उन मदरसा संचालकों की रूह फ़नह होना लाजमी है जिन्होंने विदेशी फंडिंग से आलिशान मदरसे की इमारत तो खड़ी कर ली लेकिन हिसाब किताब के नाम पर सब कुछ ‘सिफर’ है।
मदरसों में आधुनिक शिक्षा पर ज़ोर

…… मेरठ। मदरसों में दीनी तालीम के साथ साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जानी चाहिए। यह बातें उलेमा ने रविवार को श्याम नगर स्थित मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन में आयोजित दीनी जलसे में कहीं। इस दौरान पांच छात्र हाफिज ए कुरआन बने जिन्हें पगड़ी बांधकर सम्मानित किया गया। जलसे की अध्यक्षता करते हुए मौलाना मशहूदुर्रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी ने कहा कि दीनी और दुनियावी तालीम के मिश्रण से सफल भविष्य की नींव रखी जाती है। संचालन कारी साजिद साहब ने किया। सरपरस्ती मौलाना सलमान का़समी ने की। कार्यक्रम के संयोजक मौलाना अलीमुद्दीन रहे। मुख्य अतिथि दारुल उलूम देवबंद के उस्ताद ए हदीस मौलाना अब्दुल्लाह मारुफि एवं मौलाना मुकी़म थे। मुख्य अतिथि ने कहा कि शिक्षा इस दौर की सबसे बड़ी जरूरत है क्योंकि शिक्षित समाज देश की उन्नति और विकास में बड़ा रोल अदा करता है।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर मौलाना अफसर, मौलाना मुकी़म, मौलाना अब्दुल सत्तार, का़री कलीम, मुफ्ती ताहिर, मौलाना अब्दुल जब्बार, मौलाना शाहनवाज जमाली, आरिफ, हाजी शाहिद अब्बासी, फैसल, कारी आदिल, कारी जिब्राइल, मौलाना असगर, मौलाना असद, उमर और हाजी शेख सलाहुद्दीन मुख्य रूप से मौजूद रहे।