निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल के विरोध प्रदर्शन, जेल भरो की चेतावनी, बिल पारित हुआ तो ‘लाइटनिंग एक्शन’
नई दिल्ली /लखनऊ/मेरठ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर आज उत्तर प्रदेश सहित देश के सभी राज्यों में लाखों बिजली कर्मियों ने कार्य बन्द कर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और इंजीनियर कार्यालयों से बाहर आकर बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल हुए।
निजीकरण पर रोको
संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उत्तर प्रदेश में चल रही निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त नहीं की गई और निजीकरण के लिए टेंडर जारी किया गया, तो प्रदेश के सभी बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और इंजीनियर सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारम्भ करेंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
मत करना बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पारित
समिति ने यह भी कहा कि यदि संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पारित करने का प्रयास किया गया, तो इसकी तीखी प्रतिक्रिया होगी। देश के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के तत्काल कार्य बन्द कर ‘लाइटनिंग स्ट्राइक’ पर चले जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। आंदोलन पावर सेक्टर के निजीकरण के विरोध में, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 एवं प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को वापस लेने, उत्तर प्रदेश में चल रही निजीकरण प्रक्रिया को निरस्त करने तथा बिजली कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांगों को लेकर की गई है।
संघर्ष समिति ने बताया कि पहली बार बिजली कर्मचारियों के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों, मजदूर संगठनों और किसानों की संयुक्त एकजुटता के कारण यह आंदोलन स्वतंत्र भारत के महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आंदोलनों में शामिल हो गया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर सेक्टर में नियमित प्रकृति के कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग की जा रही है, जिससे न केवल कर्मचारियों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है बल्कि बिजली व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रमुख मांगों में आउटसोर्सिंग पर रोक, नियमित पदों पर सीधी भर्ती तथा आउटसोर्स कर्मियों का नियमितीकरण शामिल है।
संघर्ष समिति ने चिंता व्यक्त की है कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण (वितरण, उत्पादन तथा टीबीसीबी के माध्यम से ट्रांसमिशन) गरीब उपभोक्ताओं, छोटे एवं मध्यम उद्योगों तथा आम जनता के हितों के विरुद्ध है। इसलिए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को तत्काल वापस लिया जाना आवश्यक है। सूबे की राजधानी समेत प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मियों के साथ हजारों किसानों ने भी संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शन किया। लखनऊ स्थित शक्ति भवन पर आयोजित विशाल प्रदर्शन को संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ संयुक्त किसान मोर्चा के एकादशी यादव एवं दिनेश रावत ने संबोधित किया।
निर्णायक संघर्ष की तैयारी
प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक भागीदारी के साथ हुए इस शांतिपूर्ण और अनुशासित आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिजली कर्मी निजीकरण के विरुद्ध और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था की रक्षा के लिए निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार हैं।