210-B में घेरी जा रही जमीन

kabir Sharma
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भू-माफियाओं पर नहीं सीईओ व डीईओ की कार्रवाई का खौफ, पिछले दिनों की गई थी बड़ी कार्रवाई, इस बार पीछे से निकला है रास्ता

मेरठ। सुप्रीमकोर्ट ने छावनी के जिस 210-बी के सभी अवैध निर्माण ध्वस्त किए जाने के आदेश कैंट बोर्ड के पक्ष में पारित किए हैं, उस बंगले पर भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि पड़ गई है। कुछ दिन पहले ही डीईओ के निर्देश पर कैंट बोर्ड ने बड़ी कार्रवाई करते हुए यहां अवैध कब्जे के लिए गए किए अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए थे, लेकिन लगता है कि कैंट बोर्ड का भी खौफ अब 210-बी की बेशकीमती जमीन पर नजर रखने वाले भू-माफियाओं को नहीं रह गया है। उन्होंने अब इस बंगले के दूसरे हिस्से की जमीन को घेरना शुरू कर दिया है। उसके लिए बाकायदा जाली लगा दी गयी है। लेकिन इतना तय है कि इस बंगले में जमीन की यह घेराबंदी बंगले के कथित मालिक आनंद प्रकाश अग्रवाल या दूसरे साझीदारों के बगैर मुमकिन नहीं है। केवल जमीन ही नहीं घेरी जा रही है बल्कि अब जिन लोगों ने इस बंगले में कुछ अवैध निर्माण जो ध्वस्त होने से रह गए थे उन दुकानों पर शटर लगा लिए और शोरूम तक बनवा दिए हैं। इनका किराया ही करीब दो लाख रुपए प्रति माह बताया जाता है। जो अवैध काविज हैं वो दो-दो लाखा कमा रहे हैं। यह सब केवल और केवल इस बंगले को लेकर कैंट अफसरों की अनदेखी के चलते हो रहा है। यदि एक बार डीईओ और सीईओ सरीखे अफसर इस बंगले का मुआयना भर कर लें तो सारी मुसीबत ही खत्म हो जाए और जो इस बंगले की बेशकीमती जमीन घेरने रहे हैं फिर वो भी शांत हो जाएं।

भू-माफियाओं को शायद कुछ हो गया गलत मुगालता

बंगला 210-बी में कुछ लोगों ने पिलर खड़े कर लिए थे। वहां लोहे का भारी भरकम गेट लगा दिया था। इसकी जानकारी जब डीईओ को मिली तो कैंट बोर्ड की मार्फत कार्रवाई में देरी नहीं की गयी। वो सारे पिलर और गेट कैंट बोर्ड के स्टाफ ने ध्वस्त कर दिए, लेकिन उसके बाद अब इस बंगले की जमीन को घेरने का सिलसिला शुरू हो गया है। लगता है कैंट बोर्ड की कार्रवाई में शायद कुछ कमी रह गई जो भू-माफिया अब जमीन घेरने की हिमाकत कर बैठे हैं। वो शायद भूल गए हैं कि इस वक्त कैंट बोर्ड के सीईओ जाकिर हुसैन हैं।

ये है बंगले का इतिहास

बंगला 210-बी ओल्ड ग्रांट का आवासीय बंगला है। जीएलओ में यह पुष्पादेवी आदि के नाम दर्ज है। इस बंगले में 96 कोठियां हैं इसके अलावा भी कई अन्य अवैध निर्माण हैं जिनमें 210-बी के साउथ, सैंटर व पूर्वी साइड में सुप्रीमकोर्ट ने अवैध निर्माण माने। पूर्व के निर्माण का एक बड़ा हिस्सा साल 2016 में ध्वस्त किया जा चुका है, हालांकि अभी भी काफी कुछ रह गया है, जिसको आबाद कर लिया गया है। इससे पहले साल 1994 में इस बंगले में बड़े स्तर पर अवैध निर्माण कराए गए। बताया जाता है कि उसी दौरान आनंद प्रकाश अग्रवाल ने पुष्पा देवी से अपनी पत्नी मीनू अग्रवाल ने नाम पावर ऑफ अर्टानी करा ली थी। आरोप है कि आनंद प्रकाश अग्रवाल ने 210-बी का स्टेट फ्री होल्ड बताकर वहां प्लाटिंग शुरू कर दी। तमाम लोगों ने मौके की जगह जानकार वहां प्लाट खरीदे और बाद में पक्के अवैध निर्माण भी किए। अदालत ने सभी निर्माण अवैध माने। साल 1994 में कैंट बोर्ड ने नोटिस दिए। नोटिस के खिलाफ आनंद प्रकाश अग्रवाल ने लोअर कोर्ट से स्टे हासिल कर लिया। इसके खिलाफ कैंट बोर्ड हाईकोर्ट चला गया। 19 अप्रैल 1995 में हाईकोर्ट ने कैंट बोर्ड और आनंद प्रकाश अग्रवाल को यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी कर दिए, लेकिन आरोप है कि आनंद प्रकाश अग्रवाल ने हाईकोर्ट के स्टे के खिलाफ जाकर बड़े स्तर पर अवैध निर्माण कराए। साल 1995 में डीईओ ने एक मुदकमा भारत सरकार के बिहाफ पर करा दिया यह बात अलग है कि उसकी पैरवी करना बाद के डीईओ अफसर भूले रहे। हालांकि इस दौरान कैंट अफसर अवैध निर्माणों को लेकर लगातार नोटिस देते रहे। बाद में जब यह मामला सुप्रीमकोर्ट में पहुंच गया और जो एसएलपी दायर की गई थी वो भी खारिज हो गयी और ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए, जिसके बाद साल 2016 में कैंट अफसरों की संयुक्त कार्रवाई में 210-बी पर बड़ी कार्रवाई कैंट प्रशासन ने की थी। जो अवैध निर्माण बाकि रह गए थे, उन पर अभी जेसीबी चलनी बाकि है, लेकिन जेसीबी जहां चलनी चाहिए वहां यदि दुकानों पर शटर लग जाते हैं। कच्चे निर्माण पक्के हो जाते हैं तो सवाल डीईओ और सीईओ दोनों से सप्रीमकोर्ट पूछ सकता है।

वर्जन

इसको लेकर रक्षा संपदा अधिकारी के अलावा कैंट बोर्ड के ओएस से उनका पक्ष जानना चाहा, लेकिन अभी कोई उत्तर नहीं मिला। यदि वो अपनी बात कहते हैं तो इतनी ही प्रमुखता से उनकी बात को स्थान दिया जाएगा। उनको वाट्सअप पर भी मैसेज कर जानकारी मांगी गई। डीईओ आफिस के एसएसओ वीके गुप्ता ने बताया कि इस संबंध में अभी एक्शन लिया जाना बाकि है।

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