साेमेन्द्र बने संकट मोचन टला बंद

kabir Sharma
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सेंट्रल मार्केट बेमियादी बंद का था एलान, 21 व 22 फरवरी को होना था मेरठ बंद, सीएम से मिलवाने का किया है वादा

मेरठ। ऊर्जा राज्यमंत्री साेमेन्द्र तोमर जिनका विधानसभा क्षेत्र सेंट्रल मार्केट पड़ता है, वह मेरठी भाजपाइयाें के लिए संकट मोचन साबित हुए और व्यापारियो को किसी प्रकार समझा बुझाकर सेंट्रल मार्केट खुलवा दिया। उन्होंने व्यापारियों की सीएम योगी से मुलाकात कराने का भी भरोसा दिया है। लेकिन इससे पहले जो कुछ हुआ वह मेरठी भाजपाइयों के लिए मुश्किलों भरा रहा। हालांकि भाजपाई दूरी बनाए रहे, लेकिन पल-पल की अपडेट भी लेते रहे।

661/6 के 22 दुकानदारों को दिया था भरोसा

जहां तक सीएम से मिलने की बात है तो 661/6 के 22 को भी भरोसा दिलाया गया था, लेकिन हुआ वहीं जो कोर्ट के आदेश हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोई सरकार सुप्रीमकोर्ट के आदेश में दखल दे सकती है। फिर सुप्रीमकोर्ट में भी सरकार के ही अफसर मौजूद थे। क्यों नहीं सरकार के अफसरों ने कुछ ऐसा किया ताकि जिन पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटक रही है वो हट जाती। व्यापारी भी मान रहे हैं कि कुछ नहीं केवल 22 फरवरी का कार्यक्रम किसी प्रकार से निर्विध्न हो जाए, सुप्रीमकोर्ट के आदेश में दखल देने का मतलब अवमाना की जद में आना….

डा. साेमेन्द्र तोमर की एंट्री से पहले ये हुआ

सेंट्रल मार्केट बेमियादी बंद … विरोध में 21 व 22 को मेरठ बंद की तैयारी


सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर अवैध भवनों के खिलाफ प्रस्तावित ध्वस्तीकरण के विरोध में शनिवार को सेंट्रल मार्केट को बेमियादी वक्त के लिए बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं पीएम मोदी व सीएम योगी के मेरठ आगमन के मद्देनजर 21 व 22 फरवरी को मेरठ बंद की तैयारी है। हालांकि इसकी घोषणा होनी बाकि है, लेकिन सेंट्रल मार्केट पर आसन ध्वस्तीकरण को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार पर प्रेशर क्रिएट करने के लिए बंद के अलावा कोई दूसरा रास्ता व्यापारियों को नजर नहीं आ रहा है। सेट्रल मार्केट में जिस वक्त इसको लेकर सभा चल रही थी, उस सभा में संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता भी मौजूद थे। कोर्ट के आदेश पर अपने रोटी-रोजगार पर आए संकट से घबराए और परेशान व्यापारियों ने नवीन गुप्ता से मेरठ बंद का एलान करने का आग्रह किया तो उन्होंने कहा कि सेंट्रल मार्केट तो बंद कीजिए, मेरठ भी बंद कर दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर सेंट्रल मार्केट बंद किए जाना भी संयुक्त व्यापार समिति के अध्यक्ष विपुल सिंहल के प्रेशर से संभव हो सका। दरअसल सेंट्रल मार्केट के व्यापारी सिर पर लटक रही ध्वस्तीकरण की तलवार से राहत तो चाहते हैं, लेकिन बंद के सवाल पर दो कदम आगे चार कदम पीछे हो रहे थे, इस पर विपुल सिंहल ने कहा कि जो बाजार अभी बंद है, वो बेमियादी बंद में बदल जाना चाहिए। यह कोई छोटा संकट नहीं है। रोटी रोजगार पर यह बड़ा संकट है, इससे केवल केंद्र व प्रदेश सरकार पर प्रेशर बनाकर ही मुक्ति संभव है। उनकी यह बात व्यापारियों की समझ में आयी और सेंट्रल मार्केट के बेमियादी बंद का एलान कर दिया गया। हालांकि इसमें भी केवल वो ही व्यापारी शामिल हैं जिनके निर्माण अवैध हैं और ध्वस्त किए जाने हैं। जो प्रतिष्ठान कामर्शियल आवास विकास परिषद ने वैध माने हैं उन्होंने हो-हल्ला मचाने वालों से खुद को अलग कर लिया है, इसके चलते बंद समर्थन और बंद से अलग व्यारियों के दो धड़े हो गए हैं। वहीं दूसरी ओर इस मौके पर जोरशोर से संयुक्त व्यापार संघ के दोनों घड़ों को एक किए जाने की बात जोरशोर से उठी। हालांकि लोगों का कहना था कि पहले जो मुसीबत सिर पर मंडरा रही है उससे से तो पीछा छूट जाए, व्यापार संघ के दोनों घड़ों को बाद में भी एक किया जा सकता है।

व्यापारियों की सभा

कोर्ट के आदेश पर आयी मुसीबत से परेशान व्यापारियों ने शनिवार की सुबह सेंट्रल मार्केट में सभा की। इस सभा में व्यापार संघ के अलावा दूसरे व्यापारी व राजनीति नेता भी मौजूद रहे। कोर्ट के आदेश के खिलाफ भड़ास निकालने की वहां होड़ लग गयी। व्यापारियों का कहना था कि सेंट्रल मार्केट में 661/6 में किए गए ध्वस्तीकरण से मिले जख्म अभी भरे भी नहीं हैं और २७ जनवरी के कोर्ट के आदेश ने दम ही निकाल दिया। कोर्ट ने कुल 1446 ऐसे अवैध कामर्शियल प्रतिष्ठान चिन्हित बताए हैं जिन्हें ध्वस्त किए जाने के आदेश आवास विकास परिषद को दिए हैं। इन कामर्शियल प्रतिष्ठानों में तीन हजार से भी ज्यादा दुकानें बतायी जाती हैं। व्यापारियों का कहना था कि यदि इस बार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गयी तो व्यापारी बर्बाद हो जाएगा। हो सकता है कि कुछ आत्महत्या ही कर लें। उनका कहना था कि जो संकट अब आया है इससे बड़ा कोई दूसरा संकट उनके जीवन में दूसरा नहीं आया। जब रोटी रोजगार ही छिन लिया जाएगा तो कैसे तो परिवार को गुजारा करेंगे और कैसे बच्चों को पढ़ाएंगे और उनकी शादी करेंगे। उनका कहना था कि अब सरकार से ही उम्मीद है केंद्र और प्रदेश सरकार कुछ रास्ता निकाले।

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महिला को चुप कराने का प्रयास

सभा में बोलने वालों में एक महिला व्यापारी भी शामिल रहीं। उन्होंने कहा कि वह अपने प्रतिष्ठान की एक ईंट भी नहीं छूनें देंगी। भले ही उन्हें जान ही क्यों ना देनी पड़े। उनका कहना था कि साल २०१४ में जब केंद्र में मोदी सरकार बनी थी तो उन्होंने खुशी जाहिर की थी मिठाइयां बांटी थींं, लेकिन अब इस संकट के वक्त सरकार ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है। इससे बुरी सरकार कोई दूसरी हो नहीं सकती। इस पर वहां मौजूद भाजपाई व्यापारी नेताओं ने इस महिला को चुप कराने का प्रयास किया, लेकिन वो चुप नहीं हुईं। तमाम भाजपाई व्यापारी नेता मुसीबत की तो बात कर रहे थे लेकिन सरकार के खिलाफ वो एक शब्द बोलने को राजी नहीं थे। इस बात का खास ख्याल रखा जा रहा था कि सरकार के खिलाफ कुछ भी मुंह से ऐसा नहीं निकल जाए जो बाद में मुसीबत खड़ी हो जाए। मर्दों की इस भीड़ में केवल यह महिला ही ऐसी थी जो पूरी मर्दानगी से अपनी बात रख रही थी।

आवास विकास की ये कालोनी हैं शामिल

कोर्ट के 27 जनवरी के आदेश पर आवास विकास के जिन अवैध प्रतिष्ठानों पर संकट छाया हुआ है, उनमें केवल आवास विकास परिषद का सेंट्रल मार्केट की अवैध दुकानें ही शामिल नहीं हैं, बल्कि ध्वस्तीकरण की जिस आशंका ने व्यापारियों की रातों की नींद और दिन सुख चैन छीन लिया है। उसमें आवास विकास परिषद के अवैध प्रतिष्ठानों के अलावा शास्त्री नगर, जाग्रति विहार और माधवपुरम के अवैध निर्माण भी शामिल हैं। कुल मिलाकर 1446 अवैध निर्माण हैं जिनमें तीन हजार से ज्यादा दुकानें शामिल हैं जिनको ध्वस्त किए जाने के आदेश आवास विकास परिषद के अधिकारियों को दिए गए हैं। हालांकि जहां तक प्रस्तावित ध्वस्तीकरण के असर की बात है तो उसका एपिक इलाका सेंट्रल मार्केट बना हुआ है। सेंट्रल मार्केट के इतर शास्त्री नगर, जाग्रति विहार व माधवपुरम सरीखे इलाकों में इसका सेंट्रल मार्केट सरीखा असर देखने को नहीं मिल रहा है। लेकिन इतना जरूरी है कि कोर्ट के आदेश को लेकर जो सभा शनिवार को हुई है उसमें बाकि इलाकों से पहुंचे व्यापारी भी नजर आ रहे थे।

भाजपा नेताओं ने बनायी दूरी

सेंट्रल मार्केट में बुलायी गयी सभा का न्यौता भाजपा के सभी नेताओं और जनप्रतिनिधियों को दिया गया था, लेकिन पीएम मोदी व सीएम मोदी के 22 फरवरी के कार्यक्रम को देखते हुए भाजपा कि किसी भी कदावर नेता ने सेंट्रल मार्केट की सभा में पहुंचने की जुरूत नहीं की। पार्टी के तमाम नेताओं ने सेंट्रल मार्केट के परेशान हाल व्यापारियों की सभा से दूरी बना ली। दरअसल इस सभा की जानकारी भाजपा के तमाम नेताओं को पहले से थी। सूत्रों ने जानकारी दी है कि जिन्हें बुलाना चाहते थे उनमें से कुछ ने तो अपने लोकेशन आउट ऑफ स्टेशन बतायी और जिन्होंने आने का वादा कर लिया था जब सभा शुरू होने वाली थी तो उनको मोबाइल किया तो नंबर आउट ऑफ रेंज जाता रहा। स्थिति यह हो गयी कि ऊंगलियों पर गिनने लायक भाजपा नेता भी सभा में नहीं पहुंचे।

इन्होंने किया संबोधित

कोर्ट के आदेश के खिलाफ सेंट्रल मार्केंट में हुई सभा में पहुंचे व्यापारी नेताओं में संयुक्त व्यापार समिति के अध्यक्ष विपुल सिंहल, संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष ्रनवीन गुप्ता, पवन मित्तल, मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन के महामंत्री संयुक्त व्यापार संघ के मंत्री विजय आनंद अग्रवाल, सतीश जैन, मेरठ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव शर्मा, कमल ठाकुर, नवीन आरोरा, जीतू नागपाल के अलावा सेंट्रल मार्केट, शास्त्रीनगर और माधवपुरम से आए तमाम व्यापारी नेता मौजूद रहे। सभी इस बात पर एक राय थे कि सेंट्रल मार्केट में जो बीते अगस्त माह में जो कुछ देखा वो दोबारा ना देखना पड़े। उनका मतलब ६६१/६ सेंट्रल मार्केट में आवास विकास परिषद के ध्वस्तीकरण से था। जिसमें २२ दुकानों को पूरी तरह से मिट्टी में मिला दिया गया।

कितना हुआ चंदा

मेरठ। सेंट्रल मार्केट में सभा के दौरान सबसे ज्यादा खुसर-पुसर सुप्रीमकोर्ट के आदेश के आदेश के आने के बाद कोर्ट में पैरवी को लेकर हो रही थी। सुनने में आया कि जब ३६ लाख का चंदा जमा किया गया तो फिर ऐसा क्या कारण रहा जो माकूल पैरवी नहीं की गई। कुछ यह कहते सुने गए कि जो वकील किया गया था वो तो अंतिम आदेश के दौरान कोर्ट रूम में पहुंच तक नहीं सका। जो दुकान टूट जाने और रोटी रोजगार खत्म हो जाने की चिंता में डूबे हैं ऐसे कुछ लोग यह कहते सुने गए कि जब अच्छा खासा चंदा जमा कर लिया गया था तो फिर क्यों नहीं कोई काबिल वकील कोर्ट में खड़ा किया गया। ये तमाम ऐसी बातें थी जो केवल चर्चाओं तक सीमित रहीं। किसी ने भी माइक पकड़कर इसको लेकर कुछ भी साफ-साफ पूछने और कहने की हिम्मत नहीं जुटायी। जो कुछ कहा और सुना जा रहा था वो केवल खुसर-पुसर से आगे नहीं बढ़ पा रहा था।

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661/6 के 22 दुकानदारों का अब कोई नाम भी नहीं लेता

बीते अगस्त माह में कोर्ट के आदेश पर आवास विकास परिषद के अफसरों ने सेंट्रल मार्केट के जिस ६६६१/६ प्लाट पर बने कांप्लैक्स को ध्वस्त कर उसकी २२ दुकानों को जमीदोंज कर दिया था, उनके दुकानदारों का व्यापारी नेता अब नाम तक लेने से कतराते हैं। दरअसल उस मामले में भाजपा और व्यापारी नेताओं की बुरी फजीहत जो हो गयी थी।

टाइम लाइन

सेंट्रल मार्केट स्थित 661/6 के 22 दुकानों का प्रकरण जिस वक्त पूरे पीक पर था, उस वक्त तमाम नेता इनमें व्यापारी, भाजपा और दूसरे राजनीति दलों के नेता भी शुमार थे, कहते नहीं अंघाते थे कि उनके रहते हुए कांप्लैक्स का ध्वस्त किया जाना तो दूर की बात कोई हाथ तक नहीं लगा सकता था। जब भी फ्री हुआ करते थे व्यापारी नेताओं का काफिला सीधे सेंट्रल मार्केट जा पहुंचता था। उनके पहुंचते वहां के व्यापारी आवभगत में लग जाते थे। इन व्यापारियों को तमाम दिलासे दिए गए। मंत्रियों और मुख्य मंत्रियों से भी मुलाकात करायी गयीं। इन मुलाकातों से 661/6 के 22 के दुकानदार भी गदगद थे और यह कहते नहीं अंघाते थे कि अमुक मंत्री से बात हो गयी है। सब तय हो गया है। अब किसी अफसर की हिम्मत नहीं कि यहां आकर भी झांक लें। कुछ का यह भी कहना था कि अफसर सरकार से ऊपर नहीं है। अफसरों को यदि नौकरी करनी है तो वही करेंगे जो सरकार कहेगी। कोर्ट के ऐसे आदेश तो पहले भी बहुत आए हैं। लेकिन इस सब के बावजूद 661/6 के 22 दुकानदारों के प्रतिष्ठानों पर जेसीबी भी गरजी और सभी दुकानें जमीनदोज भी हुई। यह सब इतना बताने को काफी है कि कानून से ऊपर कोई नहीं ना अफसर ना सरकार। लेकिन तब यह बात सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों की समझ में नहीं आ रही थी। बजाए कोर्ट में मजबूत पैरवी के जो नेता कह देते थे, उस पर यकीन कर कॉलर ऊंचे कर तब बात किया करते थे।
बीते अगस्त माह में जब आवास विकास परिषद ने 661/6 के 22 प्रतिष्ठानों को ध्वस्त किया, उस वक्त भी उन बाइस व्यापारियों के दुख में कोई और शुमार होने नहीं आया। अपने दुख के वो अकेले साझीदार थे। जब चंद रोज बीत गए तब जरूर व्यापारियों ने वहां जाकर रोना गाना शुरू किया। वादे किए गए कि नई सड़क पर नगर निगम के निर्माणाधीन कार्यालय में जो दुकानें बनायी जा रही हैं, उन दुकानों में661/6 के 22 दुकानदारों को दुकानें दी जाएंगी। लेकिन इसी बीच आवास विकास परिषद ने उस निर्माण को लेकर नगर निगम को ही नोटिस थमा दिया। नई सड़क के उस खसरे को लेकर प्रशासन के कई बड़े अफसरों के खिलाफ हाईकोर्ट ने कंटेम्प्ट का नोटिस निकाल दिया। दरअसल नई सड़क पर जिस जमीन पर नगर निगम के कार्यालय निर्माणाधीन है, उस जमीन का मालिकाना हक नगर निगम के पास ना होने की बात कही जा रही है। उसी को लेकर हाईकोर्ट में एक वाद भी प्रचलित है। लेकिन हाईकोर्ट से बड़े अफसरों के खिलाफ कंटेम्पट के नोटिस के बाद नई सड़क पर नगर निगम के निर्माणाधीन कार्यालय में दुकानें दिलाने की बात करने वाले नेताओं ने भी कानों को हाथ लगा लिए।

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