हाईकोर्ट के एसएसपी मेरठ को निर्देश, साल 2024 में सीबीसीआईडी ने करायी थी एफआईआर, आरोपियों पर कार्रवाई करना भूले अफसर
इलाहाबाद/मेरठ। सरकारी जगह पर कब्जा कर बनाए गए होटल अल करीम जिसका नाम अब बदलकर इलाही होटल कर दिया गया है तथा पाल होटल जिसके स्थान पर अवैध रूप से कांप्लैक्स बना दिया है, के मामले में सीबीसीआईडी की एफआईआर के बाद जो कार्रवाई की जानी थी वो नहीं की गयी, जिसके चलते अब हाईकोर्ट ने मेरठ पुलिस मसलन एसएसपी को डायरेक्शन दी है और कृत कार्रवाई से अवगत कराए जाने के निर्देश दिए हैं। इन दोनों ही मामलों की जांच कर रही सीबीसीआईडी ने 29 अप्रैल 2024 को थाना देहलीगेट में एफआईआर दर्ज करायी थी। इन दोनों होटलों का मामला नगर निगम की जमीन पर कब्जा करने और बगैर मानचित्र पास कराए वहां निर्माण किए जाने से जुड़ा है। नियमानुसार दोनों में से किसी भी होटल का मानचित्र पास नहीं किया जा सकता। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि होटल अल करीम को ध्वस्त किए जाने के आदेश पूर्व में भी कोर्ट दे चुका है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी।
जानलेवा हमला
साल 2016 19 अप्रैल को इस होटल के प्रकरण में घंटाघर के निकट रहने वाले 68 वर्षीय नूर इलाही ने अलकरीम होटल को अवैध बताते हुए कोर्ट में याचिका दायर की थी। कुछ दिन पहले ही कोर्ट ने अलकरीम होटल को ध्वस्त करने के एमडीए को आदेश दिए थे, आरोप है कि तब एमडीए की टीम खानापूरी कर लौट गई। नूर इलाही ने तब आरोप लगाया था कि उसकी हिमाकत से नाराज होकर हाजी नासिर, फिरोज, आमिर, सुहैल, नदीम और वसीम आए और परिजनों के साथ उसे भी बुरी तरह पीटा। हमलावरों का कहना था कि एमडीए को जो भी होटल की सूचना दी जा रही है, वह नूर इलाही देता है। उसके बाद वीके गुप्ता ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी पैरवी के चलते ही जांच सीबीसीआईडी को दी गई। सीबीसीआईडी वाले भी 29 अप्रैल 2024 की एफआईआर के आगे नहीं बढ़ सके। याद रहे कि होटल अलकरीम पहले चार दुकानों में ढाबा की तरह संचालित होता था। निगम किरायेदारी में दो दुकानें जनकराज के नाम पर, एक दुकान उनके पिता नानंक चंद के नाम पर और एक दुकान जनकराम की मां मुकुंदारानी के नाम पर थी। होटल मालिक नासिर इलाही और फिरोज इलाही ने 23 अक्तूबर 2000 को इन चारों दुकानों में अपनी साझेदारी दर्शाते हुए दुकान के किरायेदारों से साझेदारी का शपथ पत्र तैयार करा लिया। एक सप्ताह बाद 30 अक्तूबर को नासिर और फिरोज ने इन चारों दुकानों को एक तरफा अपने नाम किराये पर करा लिया और नगर निगम से भी इनके नाम से किराये की रसीद कटनी शुरू हो गई। दरअसल इस खेल में सभी महकमे शामिल हैं। अब पुलिस भी शामिल हो गयी।
होटल पाल की फाइल कहां है
होटल पाल का मामला तो होटल अलकरीम से भी दिलचस्प है। साल 2018 में जब यह मामला तूल पकड़ा तो नगर निगम के तत्कालीन अफसरों ने ही बताया था कि पाल होटल की फाइल नगर निगम से गायब हो गयी है। निगम के त्तकालीन कालीन बोर्ड और कार्यकारिणी की बैठकाें में अनेकों बार यह प्रकरण उठा, लेकिन किसी नतीजे पर अफसर नहीं पहुंच सके। हैरानी की बात तो यह है कि जिस अवैध कांप्लैक्स पर कार्रवाई के निर्देश अब हाईकोर्ट ने दिए हैं, वो अवैध कांप्लैक्स कोई रात के अंधेरे या एक दिन में नहीं बना गया। वो दिन के उजाले में और लंबे अरसे के बाद बना लेकिन कभी भी निगम के अफसर खासतौर से प्रवर्तन दल कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुआ सका। इस मामले में अब अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी।