WHO से अलग हुआ US

kabir Sharma
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WHO का अमेरिका ने छोड़ा साथ, प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को WHO ने बताया गलत, ट्रंप की रेपुटेशन पर दुनिया में झटका

नई दिल्ली/न्यूयार्क। अमेरिका अब WHO के साथ नहीं है। WHO के ऑफिस से अमेरिका का राष्ट्रीय ध्वज हटा दिया गया है। एशिया व यूरोप के कई मुल्कों ने इसको अफसोसजनक और अमेरिका के लिए अपमान जनक बताया है। वहीं दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन का कहना है कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। लेकिन दुनिया मान रही है कि ट्रंप का WHO से अमेरिका की अलगाव ग्लोबल हेल्थ लीडरशिप पर बड़ा धब्बा, रेपुटेशन को झटका! है। भले ही ट्रंप कुछ भी क्यों ना कहें। WHO ने अफसोस जताया और कहा कि अमेरिका का योगदान दुनिया भर में लाखों जानें बचाने में मदद करता था। अब बजट कटौती से जॉब लॉस हो रहा है और ग्लोबल हेल्थ प्रोग्राम्स प्रभावित होंगे।

राष्ट्रपति बनते ही कर दिया था अलग होने का एलान

प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन (20 जनवरी 2025) एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर एक साल का नोटिस दिया था, और ठीक 22 जनवरी 2026 को यह प्रक्रिया पूरी हुई। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि WHO ने COVID-19 महामारी को “China-centric” तरीके से हैंडल किया, सुधार नहीं किए और अमेरिकी हितों के खिलाफ राजनीतिक प्रभाव में रहा। जनवरी 2026 में अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) से पूरी तरह अलगाव की घोषणा पूरी कर दी।

इमेज को गहरा झटका

WHO से अमेरिका के अलग होने को पूरी दुनिया ट्रंप की रेपुटेशन पर बुरा असर मान रही है। यह कदम ट्रंप की इंटरनेशनल इमेज को भी गहरा झटका दे रहा है। ग्लोबल हेल्थ एक्सपर्ट्स और पब्लिक हेल्थ लीडर्स इसे “सबसे ruinous” (विनाशकारी) प्रेसिडेंशियल डिसीजन बता रहे हैं। हालांकि वहीं दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन का कहना है कि बाइलेटरल डील्स से काम चलेगा, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे “slow bleed” बता रहे हैं—धीरे-धीरे होने वाला नुकसान जो रिवर्स करना मुश्किल होगा। क्या यह कदम ट्रंप की “strong leader” इमेज को बूस्ट देगा या ग्लोबल स्टेज पर अमेरिका को और कमजोर दिखाएगा? समय बताएगा!

अमेरिकी भी कह रहे हैं बुरा किया

TIME मैगजीन ने इसे “dangerous wager that puts American lives at risk” कहा, यानी अमेरिकी जानों को खतरे में डालने वाला जोखिम भरा दांव। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर Lawrence Gostin ने कहा: “यह मेरी जिंदगी का सबसे ruinous प्रेसिडेंशियल डिसीजन है।” उन्होंने इसे अमेरिकी पब्लिक हेल्थ और ग्लोबल सिक्योरिटी के लिए “scientifically reckless” बताया। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम अमेरिका की ग्लोबल हेल्थ लीडरशिप को कमजोर कर रहा है, वैक्सीन डेवलपमेंट, पोलियो उन्मूलन और फ्यूचर पैंडेमिक अलर्ट सिस्टम को नुकसान पहुंचा रहा है। ट्रंप के समर्थक इसे “America First” और sovereignty की जीत बता रहे हैं, लेकिन क्रिटिक्स कहते हैं कि इससे अमेरिका “isolated” और “unreliable partner” के रूप में देखा जा रहा है। WHO से निकलने के साथ ही US ने कई अन्य UN बॉडीज से भी दूरी बनाई है, जिससे ट्रंप की इंटरनेशनल रेपुटेशन पर “irreparable damage” की बात हो रही है।

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