कंस्ट्रक्शन कंपनी को मेन पावर का ठेका क्यों

kabir Sharma
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हिंद मजदूर सभा व आऊटसोर्सिंग संघ ने उठाया सवाल, श्रम कानूनों के बिल्कुल विरुद्ध सफाई वर्कर्स की आपूर्ति, आयुक्त नगरायुक्त से वार्ता का वादा

मेरठ। हिंद मजदूर सभा व सफाई वर्कर्स की आपूर्ति तथा भारतीयआऊटसोर्सिंग कर्मचारी संघ शाखा नगर निगम ने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को नगर निगम के लिए मेनपावर सप्लाई के ठेके को श्रम कानूनों का उल्लंघन करार दिया है। इतना ही नहीं नगर निगम बोर्ड में योगी सरकार के प्रतिनिधियों के सामने पास किए प्रस्ताव पर नगरायुक्त के यूटर्न अनुचित बताया है। इस मामले में मंडलायुक्त भानु गोस्वामी ने सफाई कर्मचारी नेताओं को नगर निगम मेरठ अधिकारियों की वार्ता सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया। कर्मचारी नेताओं ने निगम अफसरों को चेतावनी दी है कि यदि ठेकेदारी प्रथा समाप्त नहीं की गयी तो फिर महापंचायत का सामना करने के लिए तैयार रहे।

नगर निगम औद्योगिक प्रतिष्ठान

मेरठ नगर निगम श्रम कानूनों के अनुसार एक औधोगिक प्रतिष्ठान है। विनेश विद्यार्थी आदि ने मंडलायुक्त को प्रेषित पत्र में आरोप लगाया है कि नगर निगम मेरठ अब भ्रष्टाचार का, श्रम कानूनों के उल्लंघन का, शासनादेश के उल्लंघन का, कमिश्नर, डी एम, उप श्रमायुक्त मेरठ और सम्पूर्ण समाधान दिवस अधिकारी के आदेश, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के आदेश के उल्लंघन का, नगर निगम मेरठ बोर्ड पटल पर पर पारित प्रस्ताव के उल्लंघन का, राज्य मंत्री डा. सोमेन्द्र तोमर के आदेश, केबिनेट मंत्री व उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बहन बेबी रानी मौर्या जी के आदेश के उल्लंघन, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट तथा सांसद अरुण गोविल और पूर्व में सांसद रहे राजेन्द्र अग्रवाल के पत्र के अनुसार कोई कार्यवाही नहीं करके किए गए उल्लंघन का प्रतिष्ठान, बन गया है।

इन मुद्दों पर उठाए सवाल

आयुक्त को प्रेषित पत्र में हिंद मजदूर सभा व आऊटसोर्सिंग कर्मचारी संघ शाखा ने गंभीर सवाल उठाते हुए जानकारी दी है कि वर्ष 2015 में नगर निगम मेरठ और अलकनंदा कंपनी के बीच 2215 सफाई वर्कर्स की आपूर्ति हेतु अनुबंध हुआ था,
वह अनुबंध, श्रम कानूनों के बिल्कुल विरुद्ध था, उप श्रमायुक्त मेरठ द्वारा प्रश्नगत अनुबंध की जांच में श्रम कानूनों के उल्लंघन की पुष्टि हुई थी, फलस्वरूप प्रश्नगत उल्लंघन धड़ल्ले से किया जाता रहा है।नगर निगम मेरठ और राधा कृष्णा व कार्तिकेय कंपनी के बीच हुए अनुबंध के वक्त भी, श्रम कानूनों का धड़ल्ले से उल्लंघन किया गया था, 17 फरवरी 2023 में उप श्रमायुक्त द्वारा जांचोपरांत, श्रम कानूनों के उल्लंघन की पुष्टि की।

पत्र में उन्होंने कहा है कि नगर निगम मेरठ और अग्रवाल एंड कंपनी के बीच हुए अनुबंध के संदर्भ में जब उप श्रमायुक्त मेरठ के समक्ष मेरे द्वारा, अग्रवाल एंड कंपनी के पास, लेबर सप्लायर का लाईसेंस की जांच और श्रम अधिनियम 1970 की धारा 7 के अनुसार नगर निगम मेरठ का पंजीयन है अथवा नहीं और धारा 12 के अनुसार अग्रवाल एंड कंपनी का पंजीयन है अथवा नहीं की जांच के लिए, दाखिल किए गए प्रतिवेदन के अनुसार, कार्रवाई लम्बित है, जिससे स्पष्ट है कि अग्रवाल एंड कंपनी भी, गैर पंजीकृत हैं, यदि अग्रवाल एंड कंपनी, पंजीकृत हैं तो श्रम अधिनियम के अनुसार धारा 12 में हुए पंजीयन को सार्वजनिक करें। साथ ही आरोप लगाया कि अनुबंध की शर्तों के उल्लघंन का भी खेल किया जा रहा है, जैसे
57 लाख से भी अधिक राशि अग्रवाल एंड कंपनी द्वारा 2415 सफाई वर्कर्स के पी एफ का दिसम्बर 2023 का बकाया है, यदि नहीं है तो दिसम्बर 23 में पी एफ मद में किए गए भुगतान को सार्वजनिक करें और हिंद मजदूर सभा मेरठ जिला काउंसिल को पेमेंट सीट की प्रति उपलब्ध कराई जाये।

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अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन

मंडलायुक्त को अवगत कराया गया है कि अनुबंध की शर्तों के अनुसार सफाई वर्कर्स को हर महीने की 7 तारीख को मानदेय भुगतान किया जाना आवश्यक है लेकिन अन्य महिनों में और दिसम्बर 25 का मानदेय अग्रवाल एंड कंपनी द्वारा 12 जनवरी 2026 में किया गया था, अग्रवाल कंपनी को, अनुबंध के उल्लंघन के लिए नगर निगम मेरठ का पूरा संरक्षण प्राप्त है, और संरक्षण सूखा कैसे हो सकता है कुछ तो अवश्य है।


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